सदेई : भाई-बहिन के निश्छल प्रेम की अमर गाथा
गढ़वाल में चैत के महीने गायी जाने वाली चैती गाथाओं में सदेई का विशिष्ट स्थान है. सदेई की गाथा में दाम्पत्य-प्रेम या परकीया प्रेम का कोई प्रसंग नहीं है. ये गाथा पूरी तरह सहोदर भाई-बहिन के पवि... Read more
द्रोणागिरि के लोग आज भी क्यों भगवान हनुमान से नाराज हैं : तीस साल पुरानी रिपोर्ट
प्रकाश पुरोहित जयदीप द्वारा लिखा गया ये आलेख बहुत लोकप्रिय है. नब्बे के दशक में लिखे गये इस आलेख के बाद द्रोणागिरि बहुचर्चित हो गया था. दर्जनों वेबसाइट्स, पोर्टल्स और पत्रिकाओं में इस आलेख क... Read more
चैतोल पर्व : लोकदेवता देवलसमेत द्वारा सोरघाटी के बाईस गांवों की यात्रा का वर्णन
मध्यकाल में लगभग शत-प्रतिशत पहाड़ कृषि खेतीबाड़ी पर ही जीवनयापन करता था. जीवन प्रकृति के समीप था, आचार व्यवहार हर प्रसंग में ईश्वर भगवान अदृश्य अलौकिक शक्तियों पर अटल विश्वास आस्था थी. कदाचि... Read more
ले गुड़ खा, साल भर सांप-कीड़े नहीं दिखेंगे कहकर सुबह ही ईजा देशान* में गुड़ दे दिया करती थी और मैं बड़ी उत्सुक्तावस गुड़ खाते हुए उठता था कि आज कहाँ धमाका होने वाला है. धमाका दरअसल हर बैशाखी... Read more
सब ओर प्रकृति में हरियाली सज जाती है. नई कोंपलों में फूल खिलने लगते हैं. चैत मास लग चुका है. ऋतु रैण की परंपरा रही थी बरसों पहले तक. जब गाँव-गाँव बादी या नैका हारमोनियम, सारंगी ढोलक की ताल... Read more
द्वार पूजा का पर्व भी है फूलदेई
उत्तराखण्डियों का बालपर्व – फूलदेई सनातनी संस्कृति में घर का द्वार केवल घर में प्रवेश करने का रास्ता न होकर वन्दनीय पूजनीय माना जाता है. घर बनाते समय द्वार की दिशा का निर्धारण वास्तुशा... Read more
बसंत पंचमी से प्रारम्भ बसंत मैदानी क्षेत्र में होली के साथ विदा ले लेता है पर पहाड़ में ये बैसाखी तक अपने पूरे ठाठ में देखा जा सकता है. मैदानी बसंत के प्रतीक-पुष्प टेसू, ढाक, कचनार, सरसों पह... Read more
कुमाऊं में होली की विधाएं
कुमाऊं में होली की चार विधाएं हैं – खड़ी होली, बैठकी होली, महिलाओं के होली, ठेठर और स्वांग. खड़ी होली का अभ्यास आमतौर पर पटांगण (गांव के मुखिया के आंगन) में होता है. यह होली अर्ध-शास्... Read more
कालीचौड़ गौलापार में स्थित काली माता का प्रख्यात मंदिर है. हल्द्वानी से 10 किमी और काठगोदाम से 4 किमी की दूरी पर स्थापित कालीचौड़ मंदिर के लिए काठगोदाम गौलापार मार्ग पर खेड़ा सुल्तानपुरी से... Read more
चौली की जाली मुक्तेश्वर: जहां शिवरात्रि में होती है संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण
शिवरात्रि के पर्व मे आस्था का अनोखा मंजर सामने आता है मुक्तेश्वर के चौली की जाली नामक पर्यटक स्थल पर, सैकड़ों की तादाद मे इस दिन शादीशुदा महिलाएं, जिन्हें तमाम कारणों के चलते संतान सुख प्राप... Read more


























