शिखरों के स्वर : ‘स्त्रीधन’ गौरा मैसर तीज
लॉ की पढ़ाई करते वक़्त हिन्दू लॉ की किताब में शादी के शीर्षक में एक शब्द पढ़ा था “स्त्रीधन” यानी विवाह के वक़्त जो उपहार (जेवर,चल अचल संपत्ति,और भी तमाम उपहार) नवेली वधु को दिया... Read more
देव भूमि अल्मोड़ा जहां अष्ट भैरव और नव दुर्गाओं का वास है, इन्हीं नव दुर्गाओं में से एक नन्दादेवी भी है. नन्दादेवी जो सम्पूर्ण पर्वतीय प्रदेश में परम पूज्य देवी है, को वर्तमान स्थल में सन् 1... Read more
अल्मोड़ा में ग्रीष्म की पीली उदास धुधलाई सन्ध्या की इस वेला में, मैं एकाकी बैठा कसार देवी के शिखर पर और देख रहा हूं सुदुर हिमाच्छादित नन्दादेवी के शिखर को ! थके मादे सूरज को अस्तमुखी कि रणे... Read more
पहाड़ों में सातों-आठों की बहार आ गयी है
भादों की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को कुमाऊं और नेपाल में हर्षोल्लास और श्रृद्धा भक्ति से भरा प्रकृति को समर्पित, उसकी पूजा का त्यौहार मनाया जाता है सातूं आठूं. शिव पार्वती तो हिमालय में ही वास क... Read more
सातों-आठों के लिये आज भिगाते हैं बिरुड़े
कुमाऊं में आज से लोकपर्व सातों-आठों की आगाज़ है. कुमाऊं में सबसे उल्लास से बनाये जाने वालों लोक्पर्वों में सातों-आठों एक महत्त्वपूर्ण पर्व माना जाता है. आज इस पर्व की शुरुआत बिरुड़े... Read more
कल है पहाड़ियों का लोकपर्व घ्यूं त्यार
कुमाऊं में भादों मास की संक्रांति घ्यूँ त्यार मनाया जाता है. इसे ‘ओलकिया’ या ‘ओलगी’ संक्रान्त भी कहते हैं. इस दिन घी खाने की परंपरा रही. इस कारण इसे घ्यूँ त्यार या घी... Read more
लोक में रचे बसे रंग और पहाड़ की कलाकारी
पहाड़ में अपनी भावनाओं को रेखाओं, आकृतियों का रूप दे उनमें रंग भर जीवंत कर देना हर घर-आँगन, देली-गोठ और देबता की ठया में दिखाई देता. इसमें हाथ का सीप होता. कुछ नियम कायदों के संग सीधी सादी म... Read more
जोजोड़ा : जौनसार-बावर की अनूठी विवाह प्रणाली
मेरी पैदाइश और परवरिश कई छोटे कस्बों एवं नगरों में हुई है, इसके बावजूद मेरा अपने पैतृक स्थान से अलग ही लगाव रहा है. मेरा ये विश्वास रहा है कि – आप चाहे कहीं भी रहें, कोई भी काम-काज करे... Read more
ढांटा ब्या उत्तराखण्ड के खशों में प्रचलित तथा सामाजिक मान्यता प्राप्त निरनुष्ठानिक विवाह का एक प्रकार था. इसमें कोई सधवा (परिव्यक्ता या अपरित्यक्ता) अपने पूर्व पति को अथवा विधवा स्त्री मृत प... Read more
महादेव के वीर गण लटेश्वर का मंदिर
थलकेदार से लगभग 2500 फीट की ढलान पर दुर्गम मार्ग को पार कर लटेश्वर नामक मंदिर आता है. यहाँ पर एक सम्पूर्ण विशाल शिला खण्डित होकर गुफा रूप में परिवर्तित हुई है जहाँ “लाटा” देव की... Read more


























