लैंसडाउन : गढ़वाल रायफल्स का गौरवशाली केंद्र
लैंसडाउन उत्तराखण्ड के गढ़वाल मंडल का एक पौड़ी जिले का एक खूबसूरत पहाड़ी कस्बा है. 2001 की जनगणना के आधार पर लैंसडाउन की आबादी सात हजार से कुछ ज्यादा थी. कालीडांडा पहाड़ी की ढलान पर बसे लैंसडाउन... Read more
सोर घाटी में गंगोत्री गर्ब्याल राजकीय बालिका इन्टर कालेज के परिसर में समय एक किला या गढ़ हुआ करता था. 1960 में स्कूल के सभागार निर्माण हेतु इसे तोड़ दिया गया. इस किले का लोकप्रिय नाम था खड़कोट... Read more
चंद शासकों ने अपनी खस प्रजा को नियंत्रित करने हेतु हिमांचल से योद्धा बुलाये थे. हिमांचल से बुलाये इन योद्धाओं को चंद शासकों ने अपनी सेना में सैनिक और ऊंचे पदों पर रखा. कुमाऊं में कांगड़ा और अ... Read more
अल्मोड़े में अपनी राजगद्दी छिनने के बाद चंद राजा मोहनचंद मदद के लिये जगह-जगह भटक रहा था. उसे गुजर के लिये 10 रुपये रोज के मिल रहे थे जिसमें उसकी गुजर कहां होनी थी. मोहन चंद मदद के लिये रामपुर... Read more
उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में पौड़ी जिले का ऐतिहासिक क़स्बा है श्रीनगर. अलकनंदा नदी के तट पर बसा श्रीनगर भारत के उन ऐतिहासिक स्थलों में माना जाता है जो 5000 साल पहले से विद्यमान हैं. इन सालों मे... Read more
गढ़वाली राजा जिसके आदेश पर प्रजा अंग्रेजों की मुर्गियां और कुत्ते पालकी में ढ़ोती थी
गढ़वाली राजा सुदर्शन शाह की राजनैतिक और आर्थिक स्थिति शुरुआत में बहुत खराब थी. कनखल के युद्ध के बाद एक बात वह समझ गया था कि उसकी भलाई अंग्रेजों की भक्ति में ही है. भारत के अधिकांश छोटे राजाओं... Read more
कुमाऊं में मोटर यातायात की शुरुआत
कुमाऊं में सर्वप्रथम मोटर यातायात की शुरुआत 1915 में काठगोदाम-नैनीताल के बीच हुई थी. उसके बाद 1920 में काठगोदाम से अल्मोड़ा के लिए यात्री लॉरियों की सेवा का प्रारंभ हुआ. अल्मोड़ा के मुंशी ला... Read more
एक फायर के तीन शिकार कुली, मुर्गी और ‘अल्मोड़ा अख़बार’ यह टिप्पणी गढ़वाल समाचार पत्र की है. गढ़वाल समाचार पत्र ने यह टिप्पणी तब की थी जब ब्रिटिश सरकार ने अल्मोड़ा अखबार को बंद करवा दि... Read more
उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मंडल के जिला ऊधम सिंह नगर का शहर है काशीपुर. 2011 की जनगणना के मुताबिक काशीपुर तहसील की कुल आबादी 2,83,136 है. इस लिहाज से यह कुमाऊं मंडल का तीसरा और राज्य का छठा बड़ा शह... Read more
फल्दाकोट मध्यकाल में कुमाऊँ का एक सशक्त पहाड़ी राज्य था. फल्दाकोट राज्य के अंतर्गत पाली पछाऊं का कोसी, स्याहीदेवी, ताड़ीखेत व सल्ट का ज्यादातर हिस्सा आता था. फल्दाकोट पर कत्यूरियों की ही एक शा... Read more


























