कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा
रात ढलते ही जब सुबनी और लाली दोनों बहनें पानी भरने के लिए गाँव के पनघट पर पहुँचीं, तो अचानक सुबनी की नज़र एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी जो बांझ के पेड़ के नीचे, खुले आसमान में अपनी लोईया (ऊन की शॉल... Read more
कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा
बड़ी पुरानी बात है. पांडु राजा के पाँच पुत्र थे, पांडव और धृतराष्ट्र के सौ पुत्र थे, कौरव. राज्य आधा-आधा बँटा था, पर कौरवों में सबसे बड़ा दुर्योधन बड़ा कपटी और हठी था. उसने छल से पांडवों को... Read more
शकटाल का प्रतिशोध
पिछली कथा में हमने देखा कि कैसे योगनंद सत्ता तक पहुँचा, शकटाल ने अपने सौ पुत्र खो दिए, और वररुचि राज्य के प्रधान मंत्री बने. पर सत्ता का स्थिर रहना ही अंत नहीं होता, वास्तविक परीक्षा तब शुरू... Read more
एक गुरु की मूर्खता
केरल की मिट्टी में कुछ तो है, या शायद वहाँ की हवा में, जो मलयालियों के स्वभाव में हल्की-सी बेबाकी, तंज और व्यंग्य भर देती है. इसलिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि मध्यकालीन केरल के कई प्रसिद्ध लो... Read more
प्रेम में ‘अपर्णा’ होना
हिमालय की गोद में राजा हिमवान और रानी मेना के यहाँ जन्मी पार्वती बचपन से ही शिव को अपने आराध्य के रूप में देखती थीं. शिव कैलाश के योगी थे, भस्म से विभूषित, जटाओं में गंगा धारण किए और संसारिक... Read more
घमंडी पिता और उसकी सीख
हिमालय की ऊँची पहाड़ियों के बीच एक छोटा-सा गाँव था. पत्थर के घर, देवदार के जंगल और पास ही बहती ठंडी नदी; यही वहाँ की पहचान थी. उसी गाँव में एक किसान रहता था. मेहनती था, लेकिन उससे भी ज़्यादा... Read more
उपकोशा और उसके वर
उपकोशा और उसके वर वररुचि जब अपने गुरुओं व्यादि और इन्द्रदत्त के साथ विद्याध्ययन कर रहे थे, उसी समय एक दिन इन्द्रोत्सव के दौरान उनकी दृष्टि एक अत्यंत सुंदर युवती पर पड़ी. वह सौंदर्य में ऐसी थ... Read more
मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा
हिमालय की घनी घाटियों और देवदार के जंगलों के बीच एक शांत इलाका था. वहाँ एक ताक़तवर भालू रहता था. उसका शरीर भारी था, आवाज़ गहरी और दिल सीधा-सादा. उसे जंगल के नियमों पर भरोसा था—जो मेहनत करे,... Read more
बहुत पहले की बात है. हिमालय की तलहटी में बसे एक घने जंगल और उसके पास बसे गाँवों में एक बंदर रहता था. उसका नाम था बहादुर पून. नाम के अनुसार वह सचमुच बहादुर तो था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताक़त उ... Read more
एक रोटी, तीन मुसाफ़िर : लोभ से सीख तक की लोक कथा
पुराने समय की बात है. हिमालय की तराइयों और पहाड़ी रास्तों से होकर जाने वाले एक लंबे पैदल मार्ग पर तीन मुसाफ़िर सफ़र कर रहे थे. तीनों अलग-अलग जगहों से आए थे, लेकिन मंज़िल कुछ समय के लिए एक ही... Read more


























