बहुत पहले की बात है. हिमालय की तलहटी में बसे एक घने जंगल और उसके पास बसे गाँवों में एक बंदर रहता था. उसका नाम था बहादुर पून. नाम के अनुसार वह सचमुच बहादुर तो था, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताक़त उ... Read more
200 साल पहले कैसा था उत्तराखंड
‘ट्रैवल्स इन द हिमालयन प्रोविन्सेज़ ऑफ़ हिंदुस्तान एंड द पंजाब’ उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभिक हिमालयी समाज, भूगोल और राजनीति को समझने का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथ है. इसके लेखक विलियम मूरक्... Read more
जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे
पिछली कड़ी : उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस उत्तराखंड में पलायन मात्र रोजगार का ही संकट नहीं रहा, यह तो पिछले दो सौ सालों से हो रही हलचल से उपजीबहुआयामी संरचनात्मक विफलता दिखा... Read more
एक रोटी, तीन मुसाफ़िर : लोभ से सीख तक की लोक कथा
पुराने समय की बात है. हिमालय की तराइयों और पहाड़ी रास्तों से होकर जाने वाले एक लंबे पैदल मार्ग पर तीन मुसाफ़िर सफ़र कर रहे थे. तीनों अलग-अलग जगहों से आए थे, लेकिन मंज़िल कुछ समय के लिए एक ही... Read more
तिब्बत और उससे जुड़े पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों का समाज लंबे समय तक भौगोलिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रूप से बाहरी दुनिया से अलग रहा. इस अलगाव का प्रभाव वहाँ की सामाजिक संरचनाओं पर स्पष्ट... Read more
इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक स्मृति के मौन संरक्षक
हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के गांवों और कस्बों में जब कोई आगंतुक किसी पुराने घर या मंदिर के सामने ठहरता है, तो सबसे पहले उसकी दृष्टि जिस तत्व पर टिकती है, वह है – नक्काशीदार लकड़ी... Read more
नाम ही नहीं ‘मिडिल नेम’ में भी बहुत कुछ रखा है !
नाम को तोड़-मरोड़ कर बोलना प्रत्येक लोकसंस्कृति की खूबी रही है. राम या रमेश को रमुवा, हरीश को हरूवा, सुरेश को सुरिया. ये नाम केवल लोकव्यवहार में प्रचलित थे, इनमें एक स्नेह एवं अपनत्व की भावन... Read more
उत्तराखंड सरकार ने कृषि भूमि पर निर्माण व भूमि उपयोग संबंधित पूर्ववर्ती नीति में फेरबदल किया है. यह निर्णय लिया गया कि अब कृषि भूमि पर पर्यटन/रिसोर्ट आदि के निर्माण को भूमि उपयोग परिवर्तन के... Read more
विश्व के लगभग हर महाद्वीप में ऐसे व्यक्ति पाए जाते हैं जिन्हें बीमारी, संकट और मानसिक असंतुलन से निपटने का विशेष अधिकार दिया जाता है. मानवशास्त्र में इन्हें सामान्यतः शामन कहा जाता है. साइबे... Read more
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में इंसान सबसे ज्यादा जिस चीज से दूर होता जा रहा है, वह है शांति. दिन भर की भागदौड़, काम का दबाव, आर्थिक चिंताएं और लगातार शोर हमारे मन को थका देता है.... Read more



























