खसों पर हुए वैज्ञानिक अध्ययन
डीएनए, आनुवंशिकी और मानवशास्त्र की दृष्टि से एक वैज्ञानिक समीक्षा भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में यदि किसी हिमालयी समुदाय का उल्लेख सबसे प्राचीन स्रोतों से लेकर आधुनिक काल तक निरंतर मिल... Read more
वह माला के गेट पर सुबह-शाम पहरा देते मिलता
माला नाम था उसका. छरहरी काया, बला की ख़ूबसूरत. लेडीज साइकिल से जब कॉलेज आती, बालों में कलरफुल स्कार्फ बाँधे कयामत ढाती थी. लड़के उसकी एक झलक पाने को उतावले रहते थे, पर वह नाक की सीध में चलती... Read more
पहाड़ो में भूस्खलन
उत्तराखण्ड का अधिकांश भूभाग हिमालय की पर्वतीय श्रृंखलाओं में स्थित है, जहाँ तीव्र ढाल, गहरी नदी घाटियाँ, युवा भूगर्भीय संरचना तथा सक्रिय विवर्तनिक प्रक्रियाएँ प्राकृतिक रूप से... Read more
जर्मन की लड़ाई और रुद्रनाथ की चढाई
पनार बुग्याल के ऊपरी छोर वाले रास्ते पर अब हम चल रहे हैं. पनार चोटी के गले पर हार की तरह दूर तक लहराता हुआ यह रास्ता, रुद्रनाथ की ओर घनघोर कुहरा लगे होने की वजह से, धीरे-धीरे गुम ह... Read more
पिछली कड़ी : कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल सन 1928 में अल्मोड़ा के दिगोली गांव में जन्म हुआ पूरन का, तीनों ओर से घिरे हुए पहाड़, पेड... Read more
हैप्पी बर्थडे कॉर्बेट साहब
जिम कॉर्बेट उन चुनिंदा विदेशी मूल के भारतीयों में से एक हैं जिन्होंने भारत में रहकर भारतीयों से भारतीय नागरिक जैसा प्यार, सम्मान और अपनत्व पाया. अंग्रेजी शासन के दौरान उत्तराखंड के विकट... Read more
28 साल के युवा से जब टिहरी रियासत डर गई
रात का वक्त था. जुलाई की बारिश पहाड़ों को भिगो रही थी, और भिलंगना नदी हमेशा की तरह अपने पूरे वेग में बह रही थी. लेकिन उस रात नदी सिर्फ पानी नहीं, एक सत्ता का डर भी बहा रही थी. टिहर... Read more
दुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास
मानव इतिहास में सत्ता के विरुद्ध विरोध उतना ही पुराना है जितना संगठित शासन. प्रारंभिक सभ्यताओं में विरोध का स्वरूप आज की तरह रैलियों और धरनों का नहीं था. लोग शासकों के सामने सामूहिक याचिकाएँ... Read more
12 मार्च 1930 की सुबह साबरमती आश्रम के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र थे. महात्मा गांधी ने अपने हाथ में लाठी ली और 78 सत्याग्रहियों के साथ दांडी की ओर पैदल चलना शुरू किया. अगले 24 दिनों में... Read more
आज भारत में किसी बड़े प्रदर्शन, छात्र आंदोलन या राजनीतिक रैली के दौरान पुलिस द्वारा आँसू गैस के गोले छोड़े जाना एक सामान्य दृश्य है. भारतीय पुलिस की भीड़ नियंत्रण प्रणाली में यह हथियार... Read more


























