सामाजिक उत्पीड़न कुमाऊँ के लोकगीतों में अनेक प्रकार से उभरा है. इन गीतों का कोई अंग यदि इस उत्पीड़न को सम्पूर्णता में व्यक्त करता है तो वह है कुमाऊँ के ‘जागर गीत’. आंचलिक देवी-दे... Read more
परंपरा और इतिहास के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण यह लेख पल्टन बाज़ार, अल्मोड़ा प्रभात कुमार साह गंगोला जी द्वारा 2011 में लिखा गया है. श्री नंदा स्मारिका 2011 में ‘न... Read more
‘काल्द’ यानी भैरव पहली बार कैसे प्रकट हुए?
इस कहानी को विलियम एस. सैक्स की पुस्तक God of Justice से लिया गया है. यह पुस्तक गढ़वाल और मध्य हिमालय क्षेत्र की धार्मिक परंपराओं और लोकदेवताओं पर आधारित एक अध्ययन है. पुस्तक में भैरव जैसे द... Read more
कैसा था नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस?
नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस बीसवीं शताब्दी के शीत युद्ध काल की एक गंभीर और गोपनीय घटना से जुड़ा है. यह वह समय था जब परमाणु तकनीक का उपयोग राज्यों द्वारा ऊर्जा उत्पादन, वैज्ञानि... Read more
उपकोशा और उसके वर
उपकोशा और उसके वर वररुचि जब अपने गुरुओं व्यादि और इन्द्रदत्त के साथ विद्याध्ययन कर रहे थे, उसी समय एक दिन इन्द्रोत्सव के दौरान उनकी दृष्टि एक अत्यंत सुंदर युवती पर पड़ी. वह सौंदर्य में ऐसी थ... Read more
मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा
हिमालय की घनी घाटियों और देवदार के जंगलों के बीच एक शांत इलाका था. वहाँ एक ताक़तवर भालू रहता था. उसका शरीर भारी था, आवाज़ गहरी और दिल सीधा-सादा. उसे जंगल के नियमों पर भरोसा था—जो मेहनत करे,... Read more
बाल, माल व पटालों का शहर : अल्मोड़ा
अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड का प्राचीन एवं महत्वपूर्ण शहर है. मानसखण्ड ग्रन्थ में अल्मोड़ा के भू-भाग को ‘रामक्षेत्र’ कहा गया है. यहां की पहचान ‘राजपुर’, ‘अल्मपुर’, ‘आलमनगर’ नाम से भी रही है. इतिहास... Read more
जो शराब पीता है, परिवार का दुश्मन है.जो शराब बेचता है, समाज का दुश्मन है.जो शराब बिकवाता है, देश का दुश्मन है. चौंकिए मत, उत्तराखण्ड में उक्त नारे आज के नहीं वरन 42 बरस पूर्व के हैं. बात अती... Read more
200 साल पुराने यात्रा-वृतांत में कुमाऊँ के ‘खस’
उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभिक दशकों में लिखे गए यात्रा-वृतांत भारत के सामाजिक, प्रशासनिक और भौगोलिक इतिहास को समझने के महत्त्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं. रेजिनाल्ड हेबर द्वारा रचित ‘नैरेट... Read more
तिवारी मॉडल में पहाड़ की उद्योग नीति और पलायन
पिछली कड़ी : जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे उत्तराखंड की आर्थिक नीतियों में पलायन को अंतरसंरचना की कमी व शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के... Read more



























