विश्व पर्यटन दिवस: भारत में पर्यटन की संभावनाएँ
विश्व पर्यटन दिवस की शुरूआत 1980 में हुई. तब से हर वर्ष 27 सितम्बर को दुनिया भर में विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है. विश्व में पर्यटन के प्रति जागरूकता व प्रचार-प्रसार के लिए इस दिन को चुना... Read more
इन दिनों उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल के बनबसा कस्बे में सेना की भर्ती चल रही है. इस भर्ती में अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग दिन तय किये गए हैं. इस दौरान जबर्दस्त बरसात होने की वजह से शारीरिक पर... Read more
पितरों पुरखों के साथ आने वाले कल का इतिहास
हरारी की किताब सेपियन्स और होमोडियस डॉ युवल नोह हरारी ने ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से इतिहास में शोध उपाधि प्राप्त की है. अब येरुशलम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में लेक्चरर हैं. दुनिया के इतिहास पे... Read more
गाथा छिपला केदार की
पिथौरागढ़ जनपद के सीमान्त क्षेत्र के दर्जनों गाँवों में अधिशासित आराध्य देव छिपलाकेदार धारचूला तहसील के बरम से लेकर खेत तक के सभी गाँवों के इष्ट देव के रूप में स्थापित है. प्रति दो वर्ष में... Read more
दुनिया के लालच को आईना दिखाया 16 साल की ग्रेटा ने
एक पंद्रह-सोलह साल की लड़की है जो यूरोप के एक अतिविकसित देश स्वीडन में रहती है. आप उम्मीद करते हैं वह अपनी किशोरावस्था के इस सबसे सुनहरे सालों में अपनी किसी भी हमउम्र की तरह फैशन, स्लैमबुक्स... Read more
3 नवंबर 2020 को अमेरिका में राष्ट्रपति का 49 वा चुनाव संपन्न होगा आने वाला पूरा वर्ष अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार का मैराथन वर्ष होगा. जिसका प्रारंभ डोनाल्ड ट्रंप ने हाउडी मोदी... Read more
उत्तराखंड के युवकों ने पेश की एकता की अनूठी मिसाल
जैसा कि देखा जा रहा है कि देश मे इस वक़्त असहिष्णुता का माहौल है और लगभग रोज ही अलग अलग धर्मो के लोगो के आपसी झगड़ो की खबरे आना आम सी बात हो गयी है . ऐसे समय मे उत्तराखंड के चार युवकों ने, ज... Read more
किसी भी लड़की के लिए जे.एन.यू कैंपस में मिलने वाली आजादी बहुत महत्वपूर्ण है
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – चौबीसवीं किस्त पिछली क़िस्त का लिंक: इस दुनिया में आते ही तुम्हें सबसे पहले रोना होगा मेरे बछड़े! तुम आजकल खूब उछल-कूद मचा रहे हो मेरे पेट में. मैं जब भी पढ़ने... Read more
पिछले छः दशक से भी अधिक समय से रामलीलाओं में तबला वादक के रूप में भागीदारी कर रहे मनोहर लाल मास्साब, भवाली के लिए कोई अनजान चेहरा नहीं हैं. मुक्तेश्वर के पास सुनकिया के गांव से भवाली तक का उ... Read more
कब तक बैठी रहोगी इस तरह अनमनी, चलो घूम आएँ
चलो घूम आएँ - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना उठो, कब तक बैठी रहोगीइस तरह अनमनीचलो घूम आएँ.तुम अपनी बरसाती डाल लोमैं छाता खोल लेता हूँबादल –वह तो भीतर बरस रहे हैंझीसियाँ पड़नी शुरु हो गई हैंजब झमाझम... Read more


























