पहाड़ की प्रमुख मंडी हल्द्वानी के आबाद होने की कहानी बहुत रोचक है. इसका वर्तमान चाहे कितना ही स्वार्थी हो गया हो इसका भूतकाल बहुत ईमानदार और विश्वास पर आधारित था. मूल रूप से रानीखेत के रहने... Read more
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 34 पिछली क़िस्त का लिंक: सच्चा और अच्छा जीवनसाथी मिलना एक लाटरी निकलने जैसा है मेरी बेटी!मैंने तुम्हें बताया नहीं, डॉक्टर ने मेरी डिलीवरी, यानी तुम... Read more
बेरोजगारों के साथ खिलवाड़ कर रही है उत्तराखंड सरकार
उत्तराखंड में वर्ष 2019 को रोजगार वर्ष के रूप में मनाने की राज्य सरकार ने घोषणा की है. ‘रोजगार वर्ष’ – नाम से तो ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तराखंड में साल भर नौकरियों की बरसा... Read more
सिसूण का सूप बेहद स्वादिष्ट व पौष्टिक है
सिसूण का साग और कापा उत्तराखण्ड के दुर्गम क्षेत्रों में आज भी बनाया और खाया जाता है. हालांकि बीते दिनों के उत्तराखंडी भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा सिसूण भोजनथाल से गायब सा हो गया था. लेकिन... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन – 58 (पिछली क़िस्त: मनोज भट उर्फ गब्बू से पढ़े गणित के ट्यूशन के नहीं दिए गए पैसों का किस्सा बारहवीं की परीक्षाओं के बाद ऐसी स्थिति बनी कि कुछ महीने एकदम खाली थे. तय हुआ क... Read more
चंद राजाओं के शासनकाल में 36 तरह के राजकर वसूले जाते थे, जिन्हें छत्तीसी कहा जाता था. थातवान परगनाधिकारी— सीरदार या सिकदार के मार्फत कर को राजकोष में जमा करते थे. उपज का छठा भाग ही कर में लि... Read more
सुल्ताना डाकू के छोड़े हुए रुपयों से खरीदी गयी हल्द्वानी के एम. बी. स्कूल की जमीन
काठगोदाम व रानीबाग के बीच ऊँची पहाड़ी पर शीतला देवी का मंदिर है. अब यहाँ चहल-पहल बढ़ गयी है लेकिन पहले यहाँ वीरानी रहा करती थी. इस स्थान को शीतलाहाट नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि चं... Read more
कोई बताए मेरे महबूब को, मेरे पास प्याज की दौलत है
बड़ा बेदर्द है ये कमबख्त प्याज. हर जगह से गायब और जहां कहीं नमूदार तो जेबों में सुराख करने पे उतर आया. ठंड का मौसम. मुंह से भाप झड़ रही है. बाहर फिज़ाओं में नन्ही नन्ही बुंदनियां तपक रही हैं... Read more
उत्तराखंड की ज़मीनों पर भू माफ़िया की गिद्ध दृष्टि बनी हुई है. उत्तराखंड सरकार द्वारा लाये गए एक नए शासनादेश से वन संरक्षण अधिनियम 1980 को कमज़ोर किये जाने की आशंका जताई जा रही है. इसे राज्य... Read more
यह कहना गलत न होगा कि उत्तराखण्ड की शादियों में जो रस्में होती थी, उनमें से कई आज बूढ़ी हो चली हैं या यूं कहें की बदलते परिवेश में अपनी प्रासंगिकता खो चुकी हैं. किसी भी समाज की संस्कृति, रीत... Read more


























