जिंदगी के सफर में गुजर जाते हैं जो मकाम, वो फिर नहीं आते… इस गीत को सुनकर संवेदी श्रोता अनायास ही एक खास किस्म के जीवन-दर्शन के बारे में सोचने पर विवश हो जाता है. वह कई बातों पर एक सिर... Read more
1955-56 की एक काव्य संध्या में देव साहब ने नीरज को सुना. उनकी कविता उन्हें इतनी भायी कि उन्होंने नीरज के सामने सीधे प्रस्ताव रख डाला, अगर कभी फिल्मी गीत लिखने का मन हो, तो मैं आपके साथ काम क... Read more
एक हिन्दी भाषी अफसर की दक्षिण भारत यात्रा के बहाने वास्कोडिगामा और अगस्त्य मुनि के किस्से
तटस्थता और पारदर्शिता, किसी भी व्यवस्था के सबसे लोकप्रिय सिद्धांत माने जाते है, जिसके चलते अक्सर चुनाव जैसे खास आयोजनों में उत्तर के लोगों को दक्षिण, दक्षिण के लोगों को पूरब, तो पश्चिम के लो... Read more
जब दीप जले आना, जब शाम ढले आना
जब दीप जले आना जब शाम ढले आना संदेश मिलन का भूल न जाना मेरा प्यार न बिसराना जब दीप जले आना… नित साँझ सवेरे मिलते हैं उन्हें देख के तारे खिलते हैं लेते हैं विदा एक दूजे से कहते हैं चले... Read more
जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है
एक हसरत थी कि आंचल का मुझे प्यार मिले मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बाजार मिले जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है तेरे दामन में बता मौत से ज्यादा क्या है जिंदगी और बता तेरा इरादा क्या है जो भी तस्... Read more
बैठी हूँ कब हो सवेरा रुला के गया सपना मेरा
रुला के गया सपना मेरा बैठी हूँ कब हो सवेरा वही है गमे दिल वही है चंदा तारे वही हम बेसहारे आधी रात वहीं है और हर बात वही है फिर भी ना आया लुटेरा… कैसी ये जिंदगी साँसों से हम ऊबे के दिल... Read more
ये कौन आया…
छह-सात दशक पहले, हिंदी सिनेमा में रोमानी उत्थान के गीतों की जो धारा बहनी शुरू हुई, लंबे अरसे तक उनका प्रभाव बना रहा. इन गीतों के जरिए सिनेप्रेमियों को लौकिक प्रेम को अभिव्यक्त करने के कई रंग... Read more
रूना लैला: क्वीन ऑफ़ बांग्ला पॉप
क्वीन ऑफ़ बांग्ला पॉप के नाम से मशहूर रूना लैला, बॉलीवुड में एक ताजा हवा के झोंके सी आईं. उनका स्वर भारतीय उपमहाद्वीप में किसी परिचय का मोहताज नहीं है. एक दौर में चटगांव से लेकर कराची तक, उन... Read more
एक लोक भाषा कवि
लोकभाषा में उनका उपनाम ‘चाखलू’ था, तो देवनागरी में ‘पखेरू’. दोनों नाम समानार्थी बताए जाते थे. भयंकर लिक्खाड़ थे. सिंगल सिटिंग में सत्तर-अस्सी लाइन की कविता लिख मारते,... Read more
दूरदर्शन के ध्वनि-संकेत के साथ, सबका अपना-अपना काम-धाम छोड़कर टेलीविजन सेट के आगे बैठ जाना. मोहल्ले का मोहल्ला यानी समूचा जमघट, समाचार सुनने को तैयार. तब दस फ़ीसदी भी लोगों के यहाँ टेलीविजन... Read more


























