समुद्र तल से 6000 फीट की ऊंचाई पर स्थित ‘मां भगवती कोकिला मंदिर’ की तस्वीरें
समुद्र तल से छः हजार फीट की ऊंचाई पर मौजूद है कनार गांव. कनार गांव जिसे की छिपलाकेदार का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. कनार गाँव में ही मां भगवती कोकिला का विख्यात मंदिर है. कनार गांव की बरम... Read more
कोटगाड़ी भगवती मंदिर की तस्वीरें
कामनापूर्ति मैया कोटगाड़ी भगवती का मंदिर थल कोटमन्या रोड पर स्थित पांखू के पास स्थित है. कोटगाड़ी मंदिर में भगवती सात्विक वैष्णवी रूप में पूजी जाती है. न्याय की देवी अधिष्ठात्री के... Read more
नववर्ष के दिन बोया जाता है ‘हरेला’
माना जाता है कि चैत्र प्रतिपदा से नये साल की शुरुआत होती है आज के दिन से ही नवरात्रि भी होती है. पहाड़ों में आज के दिन उपवास रखा जाता है और कुछ जगहों पर आज के दिन हरेला भी बोया जाता है. हरेल... Read more
गरुड़ ज्ञान चंद के समय चम्पावत के राजदरबार में बक्सी (सेनापति) के पद पर सरदार नीलू कठायत था. संभव है, वह सौन कठायत के वंश का हो. वह बड़ा बहादुर सेनापति था. राजा ने उसे हुक्म दिया कि वह तराई-... Read more
कुमाऊनी भाषा की पहली पत्रिका ‘अचल’
1937 में साल के अंत-अंत तक कुमाऊनी में एक पत्रिका का विचार जीवन चन्द्र जोशी के दिमाग में जगह बना चुका था. अपनी बोली में एक पत्रिका निकालने के लिये इस बानगी ‘शक्ति’ और ‘कुमाऊं कुमुद’ अखबारों... Read more
जब तिल्लू बड़बाज्यू भिटौला लेकर आये
भिटौली पर याद आया कि उस साल हम पहाड़ में रहे थे जब तिल्लू बड़बाज्यू भिटौला लेकर आये होंगे. आप भी सोचते होगे कि भिटौला और बड़बाज्यू का भी क्या मेल? भिटौला तो भाई या ददा लेकर आते हैं, बेणीं या... Read more
युगदृष्टा जोहारी ‘बाबू रामसिंह पांगती’
बाबू रामसिंह पांगती जोहार की उन महान विभूतियों में से एक थे जिन्होंने इस क्षेत्र के तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों, अन्धविश्वासों और डगमगाती अर्थव्यवस्था में आमूल परिवर्तन लाने का बीड़ा... Read more
कूर्मांचली परम्परा में जल का महत्त्व
मानव जीवन में बालक के जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन के विभिन्न संस्कारों में जल का महत्वपूर्ण स्थान है. व्यक्ति जल से आचमन करने पर शुद्ध होता है क्योंकि जल में औषधीय गुण विद्यमान रहते हैं. धार... Read more
देहरादून का ऐतिहासिक झंडा मेला
झंडा मेला 350 वर्ष से भी पुराना ऐतिहासिक मेला है. होली के ठीक चार दिन बाद एक महीने तक चलने वाला झंडा मेला शुरू होता है. इस मेले में सुबह दरबार साहिब के बाहर स्थापित झंडे को उतारकर उसे दूध और... Read more
शहादत दिवस विशेष : भगत सिंह आज़ादी के नायक हैं
भगत सिंह (28 सितम्बर 1907 से 23 मार्च 1931) मूर्तियाँ नायक नहीं गढ़तीं, नायकत्व बुतों का मोहताज नहीं होता. भगत सिंह इस बात के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं. आप एक हैट के नीचे कुछ अनगढ़ रेखाओं से रो... Read more

























