नरेन्द्र नेगी को पद्म सम्मान न मिलने का मतलब
उत्तराखंड के तीन व्यक्तित्वों – बछेंद्री पाल, प्रीतम भरतवाण और अनूप साह को इस वर्ष पद्म सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा हुई है. इन तीनों ही व्यक्तित्वों को बधाई. सरकारी सम्मान के बिना भी... Read more
2016 के दिसम्बर की बात होगी दिल्ली में गैर-पहाड़ी ने यूट्यूब पर एक वीडियो दिखाया. वीडियो में कुछ गोरे लड़के-लड़कियों के बीच में एक भारतीय हुड़का बजा रहा था. यह अमेरिका की कोई एक यूनिवर्सिटी थी.... Read more
जसुली अम्मा की बिखरती धरोहर
आज से कोई पौने दो सौ बरस पहले दारमा के दांतू गाँव में जसुली दताल नामक एक महिला हुईं. दारमा और निकटवर्ती व्यांस-चौदांस की घाटियों में रहने वाले रं (या शौका) समुदाय के लोग शताब्दियों से तिब्बत... Read more
उत्तराखण्ड के अरबपति दान सिंह ‘मालदार’ की कहानी
दान सिंह बिष्ट ‘मालदार’ (Dan Singh Bisht ‘Maldar’) (1906 -10 सितंबर 1964) दान सिंह बिष्ट उर्फ़ दान सिंह ‘मालदार’ (Dan Singh Maldar) उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मंडल के अरबपति... Read more
पिछली कड़ी का लिंक: हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने- 68 हल्द्वानी शहर (Haldwani City) में विभिन्न सांस्कृतिक (Cutural) टोलियों के साथ बागेश्वर, सालम, जागेश्वर आदि स्थानों से पारम्परिक वा... Read more
क्या है वान एलेन रेडियेशन बेल्ट एक अमेरिकी वैज्ञानिक हुए जेम्स अल्फ्रेड वान एलेन. 7 सितम्बर 1914 को जन्मे वान एलेन यूनिवर्सिटी ऑफ़ आयोवा के अन्तरिक्ष विज्ञान विभाग में काम करते थे. 1958 में उ... Read more
2018 में दस रुपये की एक छोटी गोल्ड फ्लैक की बत्ती सुनकर मेरी आँखे फटी रह गयी थी क्योंकि मेरा आखिरी छोटे गोल्ड फ्लैक का डिब्बा 24 रुपये का था. ऐसे में उन लोगों का हाल सोचिये जिनने एक जमाने मे... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने: 68
पिछली कड़ी का लिंक: हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने- 67 हल्द्वानी का विस्मृत इतिहास (Forgotten History of Haldwani) सामाजिक समरसता का भी इतिहास रहा है. यहाँ विभिन्न समुदायों के ढेरों संग... Read more
कुमाऊँ के पशुचारकों का देवता चौमू
चौमू देवता का मूलस्थान चम्पावत जनपद में गुमदेश स्थित चमलदेव में है किन्तु चम्पावत के अतिरिक्त पिथौरागढ़ में वड्डा के निकट चौपाता तथा अल्मोड़ा की रयूनी तथा द्वारसों पट्टियों और उनके निकटवर्ती इ... Read more
आजादी से पहले नैनीताल का शेरवुड
Read in English नैनीताल में यूरोपियन बस्ती बसने के बाद एक अच्छे स्कूल की जरुरत महसूस की गयी. इस जरुरत को सबसे पहले जुलाई 1867 में द नैनीताल डाईओसिशन स्कूल ने पूरा किया. यह प्रोजेक्ट रॉबर्ट म... Read more

























