उत्तराखंड की महिलाओं को भी माहवारी के दौरान मानसिक यातना से गुज़रना होता है
स्कूल की घंटी बजते ही सभी बच्चे अपनी-अपनी कक्षाओं में दौड़ जाते हैं. सातवीं कक्षा की स्वाति (काल्पनिक नाम) भी अपनी सहेलियों के साथ क्लास में पहुँच जाती है. परन्तु वह कक्षा में स्वयं को असहज... Read more
बाबिल घास : पहाड़ की बहुउपयोगी घास
बाबिल, जिसे गढवाल क्षेत्र में बाबड़ नाम से भी जाना जाता है, पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टानों पर उगने वाली एक लटनुमा घास की प्रजाति है. चट्टानों पर उगने के कारण इसको हासिल करना भी जोखिमपूर्ण कार... Read more
मध्यकालीन गढ़वाल की राजनीति जिसे गढ़ नरेशों के युग से भी जाना जाता है, में कुछ असाधारण व्यक्तियों ने अपनी विलक्षण प्रतिमा से इतिहास में स्थान बनाया है. इनमें पुरिया नैथाणी का नाम विशेष रूप स... Read more
टीवी में बहुत ही रोचक कार्यक्रम आ रहा था जिसका विषय था-दानव मछली. यानी ऐसी बड़ी-बड़ी मछलियाँ जो रहती तो नदी में थी लेकिन उनके जीवित मनुष्यों को निगल जाने की किंवदंतियाँ भी थीं. क्योंकि विष... Read more
तमाम जुड़ावों के बीच पद्मा दत्त पांडे के साथ बाबा हैड़ाखान को लेकर मेरा मतैक्य नहीं हो सका. वे 1970 में बाबा हैड़ाखान के भक्त बन गए और कुछ ऐसी अविश्वसनीय बातों की चर्चा उनके बारे में करने लग... Read more
स्वतः संज्ञान लेने की घड़ी
टाउन हॉल के बुर्ज़ पर एक घड़ी लगी है. घड़ी बहुत सुंदर है पर बिगड़ गई है. उसका घंटा भी झड़ गया है. समय नहीं बताती वह, फिर भी लोग उसे देखते हैं. देखने में ठीक ही लगती है, जैसी घड़ियां अमूमन हो... Read more
सन् 1988 में पीपुल्स कालेज के साथ ‘जेम पार्क’ यानी रत्न उद्यान की अखाड़ेबाजी कुछ समय तक चर्चा का विषय बनी रही. कहा गया कि सौभाग्य, श्रृंगार और वैभव का प्रतीक अब न केवल हल्द्वानी नगर, कुमाऊॅं... Read more
दम भाई निज भाई और भाई घसड़ पसड़
‘दम मारो दम मिट जाये गम’ गाना तो बीसवीं शताब्दी में बना साहब! जब कि गम मिटाने का ये नुस्खा उतना ही पुराना है, जितने भगवान भोलेनाथ. भोलेनाथ को अर्पित की जाने वाली सामग्री में चरस भी उनक... Read more
1982 में जब एनडी तिवारी हेमवती नन्दन बहुगुणा के बाद मुख्यमंत्री बने, उस समय यहां के जंगलों में भीषण आग लगी हुई थी. आग में कई लोग झुलस गये थे और दुर्घटना हुई. उ.प्र. विधानसभा में वनों की आग क... Read more
स्वतंत्रता सेनानी दादा के बारे में जानने को फ्रांस से अल्मोड़ा पहुंची पोतियां
आजादी के दौरान महात्मा गांधी के सहयोगी के तौर पर काम करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दादा के बारे में जब फ्रांस में रहने वाली उनकी दो पोतियों पता चला तो उनके बारे में और ज्यादा जानने की... Read more


















