वसंत के मौसम में बिनसर
अल्मोड़ा जिले से करीब करीब तीस किमी की दूरी पर है बिनसर. बिनसर जो कि बिनसर वन्य जीव अभ्यारण का हिस्सा है. बिनसर जहां से हिमालय की चोटियों का जादुई नज़ारा दिखता है. Binsar in Spring समुद्र तल स... Read more
उत्तराखण्ड के कई खिलाडियों ने खेलों की दुनिया में अपना मुकाम बनाया है. हल्द्वानी की प्रियंका भंडारी इसी सिलसिले में एक और नाम है. बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया ने प्रियंका भंडारी को आस्ट्रेलि... Read more
साल 1948 डॉ ऐलीजाबेथ और लॉरी बेकर का जोड़ा अपना हनीमून मनाने पिथौरागढ़ आता है. कस्बे से चार-पांच किमी की दूरी पर बसा चंडाक इन दोनों को ऐसा भाता है कि अगले कई वर्षों तक दोनों यहीं रहते हैं. ऐली... Read more
राजनीतिक सत्ता और उसके संघर्ष ने भारत की सीमाओं को हमेशा अदला -बदला, लेकिन धार्मिक परंपराओं से भारत के एक राष्ट्र के रूप में विकास में आदि गुरु शंकराचार्य का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है. Raghu... Read more
समय विनोद : उत्तराखंड क्षेत्र से हिंदी में प्रकाशित होने वाला पहला समाचार पत्र
उत्तराखंड में हिंदी उर्दू पत्रकारिता सन 1868 में ‘समय विनोद’ से प्रारंभ हुई. पूरे हिमालयी क्षेत्र से देशी भाषा में छपने वाला यह पहला पत्र था. इसके छः सात वर्षों बाद ‘अल्मोड़... Read more
चित्रकार, इतिहासकार, कूटनीतिज्ञ, कवि मौलाराम उत्तराखंड के सबसे महत्त्वपूर्ण व्यक्तियों में गिने जाते हैं. गढ़वाल वंश के शासकों के दरबार में रहने वाले मौलाराम के पास एक समय चौदह गावों की रियास... Read more
राम दत्त जोशी का जन्म नैनीताल जिले के भीमताल इलाके के शिलौटी गांव में कुमाऊं के राजा के ज्योतिर्विद पं० हरिदत्त जोशी के घर में 1884 में हुआ था. उनकी प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई. कुछ समय ह... Read more
महज एक टूरिस्ट डेस्टिीनेशन नहीं है नैनीताल. कुदरत ने तो इसे तराशने में संजीदगी बरती ही है, लेकिन शहर की और सारी खूबसूरतियां भी हैं जो इसे दूसरे शहरों से अलहदा करती हैं. यही कारण है कि जो नैन... Read more
साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज फूट डालो राज करो कि अपनी नीति के अनुसार ब्रिटिश सरकार सांप्रदायिक विचारों को पालने-पोसने का काम करती रही. फलस्वरूप हिंदू- मुस्लिम दंगे भी हुए. इस समस्या के हल... Read more
पहाड़ों में जन्मा बैल कभी सौभाग्यशाली माना जाता था अब अपने ही जीवन के लिये लड़ता है
पहाड़ों में एक समय ऐसा भी था जब अपनी बेटी के लिये घर देखने आया पिता टेढ़ी नजर से आंगन में बंधे बैल की जोड़ियों पर जरुर नज़र मारता था. उसके हष्ट-पुष्ट शरीर से वह परिवार की आर्थिक स्थिति और अपनी ब... Read more


















