1940 के दशक में पिथौरागढ़ की भवन निर्माण शैली
1940 के दशक में पिथौरागढ़ कस्बे और इसके आस-पास सड़क नहीं थी. इस इलाके के दूरदराज तक के गाँव संकरी पगडंडियों से आपस में जुड़े हुए थे. उस दौर में पिथौरागढ़ की भवन निर्माण शैली महात्मा गाँधी के... Read more
जागेश्वर में बानर का स्वांग करने वाले लड़के से सुनिये युवा पहाड़ियों की कहानी
हाँ, सौंणन में खूब रेलमपेल रहने वाली ठेरी फीर. वो मंदिर से यहाँ कुबेर जी के मंदिर तक दिनमान भर नब्बे-सौ चक्कर लग ही जाने वाले हूए मेरे. दनिया-पनुएनौला की रामलीला में भी ऐसे ही कभी बानर, कभ... Read more
उत्तराखंड में महिलाओं के आभूषण किसी को भी आकर्षित कर सकते हैं. इन्हीं आभूषणों में एक नाक की नथ या नथुली. नथ, उत्तराखंड में विवाहित महिलाओं द्वारा नाक में पहना जाने वाला एक आभूषण है. एक पारंप... Read more
बहुत दिनों बाद रक्षा बंधन की छुट्टियों में भोगीलाल जी से मिलना हुआ. चर्चा चल निकली. मैंने कहा कि ये तो गज़ब है ! एक कम्पनी ने पहले फ्री सिम बांटे, फिर फ्री फोन कॉल और फ्री इंटरनेट दिया. अब स... Read more
दाड़िम के फूल – इस कहानी की एक कहानी है
मेरी कहानी ‘दाड़िम के फूल’ की भी एक मजेदार कहानी है. आनंद तब आए जब इससे पहले मेरे दोस्त बटरोही की कहानी ‘बुरांश का फूल’ पाठकों को पठने को मिले. तब यानी सन् 60 के दशक में हम नैनीताल के डीएसबी... Read more
लम्बी धोती और छोटी धोती के नखरे
जैसा की देश भर में होता है कुमाऊं में भी ब्राह्मणों के अंदर जातीय वरिष्ठता होती है. जिसे मोटे तौर पर ठुल्ल धोत्ती और नान् धोत्ती दो भागों में बांटा जा सकता है. जिसका अर्थ लम्बी धोती और छोटी... Read more
केंद्र सरकार ने पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री पुरस्कारों की घोषणा की है. उत्तराखण्ड के अनिल जोशी और कल्याण सिंह रावत को पद्मश्री पुरस्कार दिया जायेगा. उत्तराखंड में मैती आंदोलन पर्यवारण... Read more
यारसा गम्बू उच्चहिमालय के कुछ क्षेत्रों में 3500 से 5000 मीटर तक की उंचाई में होता है. यारसा गम्बू, तिब्बती भाषा का शब्द है. स्थनीय भाषा में इसे जडि, क्यूर झार, कीड़ा, कीड़ाघास कहा जाता है. गर... Read more
मिरतोला आश्रम (पनुआनौला) में ऑस्ट्रेलिया से आ बसे अर्थशास्त्र के मनीषि, योजना आयोग के सदस्य, कृष्ण भक्त स्वामी माधवाशीष ने 90 के दशक में डॉक्टर जैक्सन के साथ धारक क्षमता (कैरीइंग कैपिसिटी) क... Read more
मानव सभ्यता का अगला पड़ाव: ऑटोमेशन, नई नैतिकता और एक ‘वैश्विक निकम्मा वर्ग’ हमारे भविष्य की तस्वीर कैसी होगी- एक सदी नहीं बल्कि महज दो दशकों के बाद? (Yuval Harari Future of Manki... Read more


























