1970 के दशक का उत्तराखण्ड का ‘चिपको आंदोलन’ विश्वविख्यात है. यह तथ्य भी कमोबेश ज्ञात है कि इस आंदोलन के पीछे मुख्य रूप से महिलाएं थीं. कुमाऊं में 1984 में छिड़ा ‘नशा नहीं,... Read more
हमारे बच्चों के लिए गांव के वीडियो ‘वाऊ फैक्टर’ हैं लेकिन उनके सपनों में जुकरबर्ग और एलन मस्क की दुनिया है
ताले में चाभी थोड़ी मुश्किल से घूमी. करीब दस महीने बाद मैं ‘अपने घर’ का तालाखोल रहा हूं. 2023 की तीस जून को यहां आकर दो जुलाई को वापस गया था. आज दस मई 2024 है. हमें देखकर लंगूरों का यूथ अचम्... Read more
सितम्बर 2008 में शेखरदा (प्रोफेसर शेखर पाठक) ने प्रसिद्ध छायाकार एवं पर्वतारोही अनूप साह तथा संवेदनशील छायाकार प्रदीप पाण्डे के साथ उच्च हिमालय के एक दुर्गम मार्ग गंगोत्री-काल... Read more
गाँव के सारे कुत्ते बाघों के पेट में चले गये
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये क्लिक करें – Support Kafal Tree साल-दो साल पहले जब पिथौरागढ़ (उत्तराखण्ड) के नैनी-सैनी हवाई पट्टी से विमान सेवा शुरू होने की खबर पढ़ी थी तो दिल-दिमाग स्मृत... Read more
अभिनय और संगीत पियूष की रगों में दौड़ता था
“कोमलांगी सिया प्यारी तू कहाँ? ढूँढता फिरता तुझको मैं यहाँ.” मंच पर राम का विलाप चल रहा है. सीता के आग्रह पर स्वर्ण मृग का आखेट करने गए राम लौटकर कुटिया में सीता को नहीं पाते. उन्हें मालूम न... Read more
करीब छह-सात वर्ष पहले जब कुमाऊं मंडल विकास निगम का बेहतरीन प्रकाशन ‘थ्रोन ऑफ गॉड्स’ (धीरज सिंह गर्ब्याल और अशोक पाण्डे) हाथ में आया था तब उसके पाठ की बजाय उसमें प्रकाशित अत्यंत सुंदर-कलात्मक... Read more
कीड़ाजड़ी – पिण्डर घाटी के जीवन का जादुई आईना
अनिल यादव की ‘कीड़ाजड़ी’ में कीड़ाजड़ी उतनी ही है जितनी कीड़े में जड़ी या जड़ी में कीड़ा होता है. नाम अवश्य एक सनसनी पैदा करता है. कीड़ाजड़ी अब अपने नाम, काम और दाम से एक बड़ी अंतर्राष्ट्रीय... Read more
बात ‘गलता लोहा’ से शुरू करते हैं, जो शेखर जोशी जी की अपेक्षाकृत कम चर्चित कहानी है. पहाड़ के एक गांव में दो सहपाठी हैं- धनराम और मोहन. धनराम लोहार का बेटा है जो कुमाऊं में शिल्पकार यानी अछूत... Read more
जीवन और जंगल से बेदखल जंगल के राजा
शोभाराम शर्मा जी का नाम मैंने प्रयाग जोशी जी से सुना था. प्रयाग जी ने 1972-73 में पिथौरागढ़ जिले के अस्कोट-जौलजीवी क्षेत्र के बीहड़ जंगलों/बस्तियों में घूम-घूम कर वनराजियों या वनरावतों (बणरौ... Read more
गांव पर लटका ताला
‘प्रधानी का चुनाव लड़ा जाए?’ एक सुबह बिल्कुल अचानक पुष्कर ने पूछा. ‘बहुत अच्छा रहेगा,’ कविता खुश हुई. ‘सही में?’ ‘बिल्कुल! जानते हो, कई बार सोचती हूं कि गांव में रहने तो हम आ गए लेकिन कर क्य... Read more


























