तुम से न हो पाएगा देश के प्यारो!
कल पुलवामा (Pulwama) में हुए कायराना हमले के परिदृश्य में हमारे साथी अमित श्रीवास्तव ने यह झकझोर देने वाली टिप्पणी अपनी फेसबुक वॉल पर शेयर की है. ऐसे समय में जब सारा मीडिया देश, देशभक्ति, रा... Read more
तू फेक मैं लोक(तंत्र)
गणतन्त्र के मौके पर राष्ट्र का नागरिकों के राष्ट्र का नागरिकों के नाम पत्र मिला था .आज उसका प्रीक्वेल भी मिल गया. तू फेक मैं लोक(तंत्र) ओए राष्ट्र… अबे देस… अमां मुल्क़… सुन... Read more
छापाए दिल इतना न उछालो
अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 18 अमित श्रीवास्तव छापे के दौरान एक सरकारी कर्मचारी के मेज की दराज़ से बरामद हुई एक डायरी में ये प्रलाप मिला जिसके बाएं हाशिये पर कृपया ‘अ’ के... Read more
आन्दोलन, सिफ़ारिश और ब्रीफकेस
अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 17 अमित श्रीवास्तव माननीय एस पी महोदय नमस्कार पत्रवाहक मेरे गाँव का है और समझिये ख़ास का है. इसकी एक वाइफ़ पेट के रोग से पीड़ित है. प्रार्थी उसका इलाज कराना... Read more
ओए नागरिक… अमाँ बाशिंदे… अबे देसवासी जियो… बसो… फलो तुम्हारी भेजी चिट्ठी मिली. चलो इस ज़माने में भी चिट्ठी पत्री बची हुई है चाहे जिस भी रूप में हो. तुम तो बेटा स्लैंग... Read more
चराग़-ए-राह बुझा क्या कि रहनुमा भी गया हवा के साथ मुसाफ़िर का नक़्श-ए-पा भी गया – परवीन शाक़िर -‘सर आई हैव स्टडीड ऑलमोस्ट एव्री एस्पेक्ट ऑफ वीमेन एम्पावरमेंट एंड आई फील कम्फर्टेबल... Read more
कविता: कवि-तान: कविता- न!: क-वितान
अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 16 अमित श्रीवास्तव (पिछली क़िस्त: तीसरी कसम उर्फ मारे गये चिलबिल) `कविता लिखने के लिए कवि होना ज़रूरी नहीं.’ ये ब्रह्म वाक्य मुझे एक `कविता: कल, आज, कल और प... Read more
तीसरी कसम उर्फ मारे गये चिलबिल
अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 15 अमित श्रीवास्तव (पिछली क़िस्त: पप्पन पांडे का निबन्ध) गुडी गुडी में दो पाट थे और जैसा कि अमूमन होता है उन दोनों के बीच एक धार बहती थी. भले लोग उसे `मानू... Read more
पप्पन पांडे का निबन्ध
अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 14 अमित श्रीवास्तव उत्तर पत्र लीक हो गया. फिर वाइरल. घोर कलियुग में ऐसा हो जाता है. प्रश्न से ज़्यादा उत्तर की औकात हो जाती है. चूंकि चर्चा चलन में है इसलि... Read more
पप्पन और सस्सू के न्यू ईयर रिज़ोल्यूशन
अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 13 अमित श्रीवास्तव समय- दिन ढलने वाला था बाकी आपको घड़ी की घटिया आदत लग चुकी है तो उसी के हिसाब से कोई भी समय लगा लो दिनांक- इकत्तीस दिसम्बर (साल बता दें त... Read more


























