उत्तराखण्ड के हस्तशिल्प और साहित्य के शौकीनों के लिए एक अच्छी खबर पिथौरागढ़ से है. लंदन फोर्ट पिथौरागढ़ में भाव राग ताल अकादमी के स्टोर में उन्हें अब राज्य की नायाब दस्तकारी के साथ-साथ साहित्य भी मिलेगा. (Uttarakhand’s Handicraft Shop in Pithoragarh)
बहुत वाजिब दामों पर इसे उपलब्ध कराया जा रहा है लंदन फोर्ट में हाल ही में खुले भाव राग ताल अकादमी के स्टोर में. यहां उत्तराखण्ड से सम्बंधित सुलभ और दुर्लभ किताबों के अलावा हस्तशिल्प भी उपलब्ध है. यहां हुड़का, ढोल-दमाऊ, नगाड़े, भौंकर, बीणाई आदि पारंपरिक वाद्य मिलेंगे. स्टोर का मुख्य आकर्षण है हिलजात्रा के मुखौटे.
हिलजात्रा मुखौटा नृत्य नाटिका रूप में मनाया जाने वाला कृषि पर्व है जिसका मुख्य पात्र स्थान विशेष पर अलग–अलग है. पिथौरागढ़ के कुछ स्थानों कुमौड़ व उड़ई में जहाँ लखिया भूत इसका मुख्य पात्र है, वहीं दूसरी ओर सतगढ़ और बुंगाछीना में महाकाली लखिया भूत की जगह लेती है. सर्वप्रथम पिथौरागढ़ के कुमौड़ नामक गाँव में इस उत्सव को हलजातरा के नाम से मनाया. तब से लेकर अब तक इस उत्सव को प्रतिवर्ष पूरे हर्षोल्लास से मनाया जाता है. कालांतर में इसका नाम हलजातरा से हिलजात्रा हो गया.
हिलजात्रा में प्रयुक्त होने वाले मुखौटे यहां भाव राग ताल अकादमी के स्टोर में आसानी से उपलब्ध है.
भाव राग ताल अकादमी के निर्देशक कैलाश कुमार का लोकसंस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार की दिशा में यह नया प्रयास है. कैलाश लम्बे समय से हिलजात्रा समेत पिथौरागढ़ की कई सांस्कृतिक विधाओं को संरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं. कैलाश भाव राग ताल अकादमी के बैनर तले विश्व रंगमंच दिवस पर पिथौरागढ़ में सांस्कृतिक औओजन भी कुछ सालों से करते आ रहे है.
गौरतलब है कि लंदन फोर्ट में हाल ही में उत्तराखण्ड के विभिन्न उत्पादों को सुलभ कराने की गरज से प्रशासन द्वारा दुकानों का आवंटन किया गया है. इन दर्जनों दुकानों में विभिन्न उत्पाद मिलना शुरू हो चुके हैं. भाव राग ताल अकादमी के इस स्टोर को भी उत्तरायणी के दिन से ही शुरू किया गया है.
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…
पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…
ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…
उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…
पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…
दुनिया बड़ी तेजी से बदल रही है. (Smriti Yatra Poem by Sindhuja) शायद हर पीढ़ी,…
View Comments
बहुत ही अच्छा कार्य है यह.जरूरत थी।