समाज

ज्येठांश: उत्तराखण्ड में पैतृक संपत्ति के बंटवारे का पारंपरिक विधान

संयुक्त परिवार के दौर में उत्तराखंड के समाज में कई तरह की परम्पराएं हुआ करती थीं. आधुनिक समाज में एकल परिवारों के चलन के बढ़ने के साथ ही इस तरह की कई परम्पराएं विलुप्त हो गयी हैं या होती जा रही हैं.

ऐसी ही एक परंपरा है ज्येठांश , इसे जेठोन, जेठाली, जेठुंड आदि के नामों से भी जाना जाता था. इस परंपरा के अनुसार – जब पैतृक संपत्ति में विभाजन की स्थिति होती थी तब उससे पहले संपत्ति का एक हिस्सा ज्येष्ठतम भाई के लिए अलग निकाल लिया जाता था.

यह हिस्सा चल व अचल दोनों ही तरह की संपत्तियों में से निकाला जाता था. इसी हिस्से को ज्येठांश, इसे जेठोन, जेठाली, जेठुंड आदि के नाम से जाना जाता था. हालांकि उन दिनों पैतृक सपत्ति में विभाजन की स्थितियां कम ही पैदा हुआ करती थीं.

ज्येठांश, इसे जेठोन, जेठाली, जेठुंड भूमि, भवन, पशुधन, या अन्य मूल्यवान वस्तु के रूप में हुआ करता था. जमीन के रूप में जयेठांश पूर्व, उत्तर दिशा या दाहिनी ओर का भूखण्ड हुआ करता था. यह भूखण्ड जमीन का सबसे उपजाऊ टुकड़ा हुआ करता था.

अगर बड़ा भाई गाँव का पधान या कमीण होता तो उसे गाँव की जमीन में से भी एक टुकड़ा दिया जाता था.

उत्तराखंड के अलावा इस तरह की प्रथा हिमाचल के डोडरा-क्वार, सिरमौर, किन्नौर आदि इलाकों में भी पायी जाती थी.

पहाड़ के कुछ हिस्सों में इस पुरातन परंपरा का पालन आज भी जारी है. जबकि मैदानी इलाकों में यह परंपरा प्रायः लुप्त होती जा रही है.

पिथौरागढ़ जनपद के कत्यूरी वंशज रजबारों में हाल तक भी इससे मिलते-जुलते विधान का अनुपालन किया जाता है. उनकी सामाजिक परंपरा के अनुसार पैतृक संपत्ति का विभाजन नहीं किया जाता है. पिता की मृत्यु के बाद अविभाजित परंपरागत संपत्ति ज्येष्ठ पुत्र को मिल जाती है. शेष पुत्रों को उस संपत्ति से भरण-पोषण का अधिकार ही प्राप्त होता है.

(उत्तराखण्ड ज्ञानकोष. प्रो. डी. डी. शर्मा के आधार पर)

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी

इस तस्वीर में आपको दिख रहे हैं "पंडित नैन सिंह रावत" — 19वीं सदी के उन महान…

1 week ago

भारतीय परम्परा और धरती मां

हमारी भारतीय परंपरा में धरती को हमेशा से ही मां कह कर पुकारा गया है. ‘माता…

1 week ago

एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता

तत्कालीन नार्थ वेस्टर्न प्रोविनेंस यानी उत्तर प्रदेश के जिस ब्रिटिश अधिकारी ने उन्नीसवीं शताब्दी के…

2 weeks ago

बीमारी का बहम और इकदँडेश्वर महाराज का ज्ञान

संसार मिथ्या और जीवन भ्रम है, मनुष्य का मानना है वह जीवों में श्रेष्ठ व बुद्धिमान…

2 weeks ago

शकटाल का प्रतिशोध

पिछली कथा में हमने देखा कि कैसे योगनंद सत्ता तक पहुँचा, शकटाल ने अपने सौ पुत्र…

2 weeks ago

बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है

उत्तराखंड के आय व्यय लेखे 2026-27 को समझते हुए यह आशंका उभरती है की क्या…

2 months ago