नैनीताल में पत्रकारिता का परचम फहराने वाले ‘विष्णु दत्त उनियाल’ की जन्म शताब्दी
आज से ठीक पैंसठ वर्ष पहले 1956 में उन्होंने पहली बार, पहले दैनिक अखबार ‘पर्वतीय’ का प्रकाशन शुरू करके पर्यटन नगरी नैनीताल में पत्रकारिता का परचम फहराया था. आज कड़े जीवन संघर्ष में तपे उस जुझ... Read more
नैनीताल मालरोड में बुरांश खिला है
भला कौन जानता था कि सरोवर नगरी नैनीताल की मालरोड पर एक दिन चिनारों की संगत में बुरांश के दो सुर्ख फूल खिल जाएंगे! लेकिन, वे खिले और एक शाम बाबा एच. एस. राना ने यह अजूबा देखा. फिर उनके मोबाइल... Read more
अनोखी शख्सियत थे कैलाश साह यानी कैलाश दाज्यू
एक अनोखी शख़्शियत थे कैलाश साह यानी कैलाश दाज्यू. एक में अनेक थे वे, किसी के लिए पत्रकार, किसी के लिए समर्पित विज्ञान लेखक, किसी के लिए गजब के किस्सागो, किसी के लिए हमदर्द दोस्त, तो किसी के... Read more
दा, उसे घुघुती मिल गई होगी
दूर पहाड़ के अपने गांव से पढ़ने के लिए मैं शहर नैनीताल चला गया था लेकिन मन में बसा गांव और बचपन के वे संगी-साथी भी मन में मेरे साथ ही चले आए थे. चले आए थे तो रह-रह कर मुझे गांव की, बचपन की ब... Read more
Popular Posts
- पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल
- घी संक्रान्ति का लोक विज्ञान
- दुनिया ने अपनाया और अपनों ने भुलाया : जन्मदिन विशेष
- गलगोटिया वाला कॉपी नहीं, असली नवाचार है अल्मोड़ा के रवि टम्टा का ड्रोन
- लोक गायिकाओं का समृद्ध इतिहास रहा है पहाड़ो में
- कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे का बहुआयामी व्यक्तित्व व कृतित्व : इतिहास से जनआंदोलन तक
- उत्तराखण्ड में वन्य-जीवों का आतंक
- उनके बारे में जो सिर्फ नाम नहीं जीवन हैं
- उत्तराखण्ड के आयुष के हाथ में दिल्ली की रणजी टीम की कमान
- उत्तराखण्ड की उन्नति शर्मा ने देश का गौरव बढ़ाया, कॉमनवेल्थ -26 में जीता कांस्य
- बचपन से छीन ली गई बचपन की तस्वीर
- खसों पर हुए वैज्ञानिक अध्ययन
- वह माला के गेट पर सुबह-शाम पहरा देते मिलता
- पहाड़ो में भूस्खलन
- जर्मन की लड़ाई और रुद्रनाथ की चढाई
- हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी
- हैप्पी बर्थडे कॉर्बेट साहब
- 28 साल के युवा से जब टिहरी रियासत डर गई
- दुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास
- गांधीजी ने दुनिया के सबसे बड़े अहिंसक आंदोलन का संचालन कैसे किया?
- भारत में आँसू गैस के गोले सबसे पहले अंग्रेज़ लाए थे
- कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल
- हरेला: प्रकृति, परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- हरेले के रंग में पहाड़ : फोटो निबन्ध
- अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत
