उत्तराखंड के युवाओं के आगे घोड़े थक जाते हैं
ओलंपिक गेम्स के साथ ही खिलाड़ियों की बदहाली पर चर्चा भी खत्म हो गई है. अगले ओलंपिक में खिलाड़ियों के निराशाजनक प्रदर्शन तक सन्नाटा रहेगा. मैं भी इस पर चर्चा नहीं करता यदि फूलों की घाटी से लौ... Read more
इन दिनों उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल के बनबसा कस्बे में सेना की भर्ती चल रही है. इस भर्ती में अलग-अलग जिलों के लिए अलग-अलग दिन तय किये गए हैं. इस दौरान जबर्दस्त बरसात होने की वजह से शारीरिक पर... Read more
उस दोपहर जब मीना से हमारी पहली मुलाक़ात हुई तो वह धान की पौधों का गठ्ठर टोकरी में लादे नंगे पैर सीढ़ीदार खेतों की ढलान पर उतर रही थी. उसकी वेशभूषा की स्थित बता रही थी कि वह सुबह से काम कर रह... Read more
अल्मोड़ा डिग्री कॉलेज में फाइन आर्ट द्वितीय वर्ष के छात्र हैं भास्कर भौर्याल. एक बेहतरीन चित्रकार. 19 साल की उम्र में ही भास्कर के हाथ जिस तरह से कागजों में पहाड़ी लोकजीवन का जीवंत चित्रण कर द... Read more
आप उत्तराखण्ड के किसी भी इलाके में सैलानी बन कर भ्रमण के लिए निकले हों तो तय है कि आपको कई जगहों पर सड़कों के किनारे-किनारे दौड़ने का अभ्यास करते, पसीने में सराबोर किशोरों के छोटे-बड़े समूह नज़... Read more
Popular Posts
- पहाड़ का वह बूढ़ा पिता
- कुमाऊं में रामलीला की परम्परा
- ‘पायर’ फिल्म के सुलगते सवाल…
- हुक्का क्लब अल्मोड़ा की रामलीला से एक्सक्लूसिव तस्वीरें
- ‘पायर’ पहाड़ की ठोस पीठ है
- धन सिंह राणा ‘संघर्षनामा’
- गौरा को किसी से शिकायत नहीं थी
- देवदार या देव दारु
- कसारदेवी : जहां स्वर्ग के सबसे करीब होने का अहसास होता है
- दुर्गम पहाड़ों तक कैसे पहुंचे महाराष्ट्र-गुजरात के पर्व
- पिथौरागढ़ में स्विट्ज़रलैंड बनने की है पूरी क्षमता
- अलमोड़े में नंदादेवी मेले की ताज़ा तस्वीरें
- अहा! कैसा होता था नंदादेवी कौतिक
- सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन
- उत्तराखण्ड की महिलाएं : स्थितियों, संघर्षों और चुनौतियों का दस्तावेज
- कामिनी तुम कौन?
- पूर्वी नयार नदी की वो बाढ़
- कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा
- बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार
- आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”
- भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्
- उत्तराखण्ड के सरोवर
- दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध
- सिंधुजा की कविता : स्मृति यात्रा
- पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल
