[11 मार्च 2013 को नैनीताल शहर में रहने वाले ख्यात फोटोग्राफर बलवीर सिंह का देहांत हो गया था. उससे कुछ समय पहले हमारी साथी विनीता यशस्वी ने इस जुझारू इंसान का एक इंटरव्यू किया था. वही प्रस्तु... Read more
सुबह करीब 6 बजे मैंने तुंगनाथ के लिये पैदल चलना शुरू किया. चोपता का छोटे पर महंगे बाजार को पार करके में पैदल रास्ते में आ गयी. ये रास्ता पत्थरों से बना है ताकि इसमें खच्चरों भी उन लोगों को ल... Read more
बिजट मंदिर : एक फोटो निबंध
लगभग शाम का 6 बज गया था जब मैं हिमांचल प्रदेश में चूड़धार का ट्रेक करके बिजट महाराज के मंदिर पहुंची. ये मंदिर हिमांचल प्रदेश की हेम्बल घाटी के चौपाल कस्बे से 26 किलोमीटर दूर है. मंदिर की दो... Read more
लखु उडियार के भित्तिचित्र
लखु उडियार उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर से 13 किमी. दूर अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मार्ग में स्थित है. लखुउडियार का हिन्दी में अर्थ हैं ‘लाखों गुफायें’ अर्थात इस जगह के पास कई अन्य गुफायें भी हैं. लखुउडिय... Read more
आँसुओं से बनी है टिहरी झील
टिहरी को बाँध बनने से पहले न देख पाने का अफसोस तो हमेशा ही रहा इसलिए इस बार मैंने बाँध बन जाने के बाद बसी नई टिहरी को देखने का मन बना लिया और अगली सुबह हरिद्वार के लिए निकल गयी. मार्च का मही... Read more
अल्मोड़े का दशहरा
अल्मोड़ा नगर में पुतले बनाने की परंपरा की शुरूआत कब हुई इसके बारे में कुछ पता नहीं है हुक्का क्लब अल्मोड़ा से निकलने वाली पत्रिका ‘पुरवासी’ के एक अंक में 1930 में बनाए गए रावण के... Read more
चादर ट्रेक लद्दाख क्षेत्र : एक फोटो निबंध
चादर ट्रेक लद्दाख क्षेत्र के जमी हुई ज़ंस्कार नदी के ऊपर सर्दियों में की जाने वाली एक दुर्गम ट्रेकिंग है. जंस्कार घाटी कि खड़ी चट्टानों की ऊंचाई 600 मीटर तक है और कुछ स्थानों में इसकी चौड़ाई... Read more
रहस्यमयी झील रूपकुंड तक की पैदल यात्रा – अंतिम
(पिछली क़िस्त का लिंक – रहस्यमयी झील रूपकुंड तक की पैदल यात्रा – 6) लौटते हुए ज्यादा परेशानी नहीं हुई पर अब बर्फ पिघलने लगी है इसलिये रास्ते में फिसलन हो गयी है जिससे चलने में परे... Read more
नैनीताल की रामलीला
नैनीताल की रामलीला का इतिहास नैनीताल में मल्लीताल की रामलीला की शुरूआत सन 1918 में राम सेवक सभा की स्थापना के साथ ही शुरू हो गयी थी. शुरूआती दौर में यह रामलीला खुले मैदान में होती थी जिसे आल... Read more
रहस्यमयी झील रूपकुंड तक की पैदल यात्रा – 6
(पिछली क़िस्त का लिंक – रहस्यमयी झील रूपकुंड तक की पैदल यात्रा – 5) सुबह 4 बजे उठी और सबसे पहले बाहर देखा. आसमान अभी भी खुला है इसलिये तसल्ली हो रही है कि ट्रेक अच्छे से हो जायेगा... Read more
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