कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 84
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 83
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
पंतनगर के सन्नाटे में धांय-धांय
कहो देबी, कथा कहो – 28 पिछली कड़ी: कहो देबी, कथा कहो – 27, आसमान टूट पड़ा क्या नहीं था तब! वर्ष 1975 तक पंतनगर विश्वविद्यालय में 36 प्रमुख विषयों में स्नातक और 11 विषयों में स्नातकोत्तर तथा पी... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 82
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
मडुआ: एक पहाड़ी अनाज का फर्श से अर्श तक का सफर
मडुआ, मंडुआ, क्वादु और कोदा नाम से पहचाने जाने वाले अनाज को लम्बे समय तक उत्तराखण्ड में वह सम्मान नहीं मिल पाया है जिसका कि वह हकदार था. मडुआ को हमेशा से निचली समझी जाने वाली जातियों और गरीब... Read more
1842 से छप रहे हैं उत्तराखण्ड में अखबार
उत्तराखंड में पत्रकारिता की शुरूआत -विनीता यशस्वी पहले अखबार उत्तराखंड के कुमाऊनी व गढ़वाली दोनों इलाकों में पत्रकारिता का इतिहास बेहद प्राचीन और रोचक रहा है. कहा जा सकता है कि 1842 में जॉन म... Read more
उत्तराखंड में आज शराब अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत स्तंभ बन गयी है. शराब बंदी का नारा देकर सरकार बनाने वाली पार्टियां हर साल शराब से राजस्व में 10% की वृद्धि लक्षित कर रही हैं. अधिनियमन बनाकर... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 81
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
मकर संक्रान्ति भारत और नेपाल के हिंदुओं द्वारा मनाये जाने वाले प्रमुख त्यौहारों में से एक है. मकर संक्रान्ति का त्यौहार पूरे भारत में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है. पौष मास में जब सूर्य... Read more
सरदार मान सिंह के रूप में सुन्दरलाल बहुगुणा
तीन बेटों और दो बेटियों के बाद 9 जनवरी 1927 को टिहरी रियासत के वन अधिकारी अम्बादत्त बहुगुणा के घर एक बेटे का जन्म हुआ. अम्बादत्त बहुगुणा और पूर्णादेवी गंगा के भक्त थे सो उन्होंने अपने सबसे छ... Read more
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