गुप्त वंश तथा कुमाऊं भाग-1
कुषाण शासन के विघटन के उपरान्त उत्तर भारत में जिन राजाओं ने अपने छोटे-छोटे स्वतंत्र राज्य स्थापित किए उनमे से एक का नाम घटोत्कच गुप्त था. गुप्त वंश का संस्थापक इन्हीं को माना जता है. कुछ इति... Read more
कुमाऊं कमिश्नर ट्रेल के तीन अच्छे काम
ट्रेल कुमाऊँ के दूसरे कमिश्नर रहे. उन्हीं के नाम पर पिथौरागढ़ और बागेश्वर के बीच के दर्रे को ट्रेल पास नाम दिया गया था. वैसे ट्रेल जनता के बीच एक बदनाम नाम था लेकिन उससे पहले के गोरखाओं के कठ... Read more
क्या हमारे सपनों का उत्तराखण्ड बन पाया है
पृथक उत्तराखंड राज्य के लिए जब आन्दोलन चल रहा था, तब अक्सर हम कहा करते थे कि उत्तराखंड के लोग देश के तमाम उच्च पदों पर हैं. वे वैज्ञानिक हैं, अर्थशास्त्री हैं, समाज शास्त्री हैं, टॉप ब्यूरोक... Read more
कुमाऊँ का अंग्रेज नवाब
1856 से 1884 के बीच उत्तराखण्ड का कमिश्नर हेनरी रैमजे रहा. हेनरी रैमजे लार्ड डलहौजी का चचेरा भाई था. अंग्रेज इतिहासकारों ने भारत में अंग्रेजी राज के 10 निर्माताओं में हेनरी रैमजे को भी स्थान... Read more
उत्तराखण्ड का इतिहास भाग- 2
प्रागैतिहासिक काल- गढ़वाल और कुमाऊँ की पहाड़ियों और उनके तलहटी क्षेत्रों में प्रागैतिहासिक काल के संबंध में अभी तक अधिक कार्य नहीं हुआ है. प्रागैतिहासिक काल इतिहास का वह काल है जिसके संबंध में... Read more
जयानन्द भारती ने 6 सितम्बर को पौड़ी दरबार में लगाया था ‘गो बैक मैलकम हेली’ का नारा
सविनय अवज्ञा आन्दोनल के दूसरे दौर से पहले कांग्रेस के बड़े नेताओं को गिरफ्तार किया जा चुका था. नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के कारण पौड़ी की जनता में असाधारण चुप्पी थी. इन दिनों संयुक्त... Read more
जिस महिला पर उत्तराखण्ड हमेशा नाज करेगा
विपरीत परिस्थितियों में भी उत्तराखण्ड की कई महिलाओं ने राष्ट्रीय पटल पर सशक्त हस्ताक्षर किये हैं. इनमें से एक हैं चंद्रप्रभा ऐतवाल. चंद्रप्रभा 24 दिसंबर 1941 को उत्तराखण्ड के सीमान्त जिले के... Read more
उत्तराखंड की काल कोठरी त्रासदी
उत्तराखण्ड में अनेक स्थानों पर सविनय अवज्ञा आन्दोलन ‘जंगलात आन्दोलन’ का रूप ले चुका था. पिथौरागढ़, लोहाघाट, चंपावत में जंगल सत्याग्रह तेजी से फैला. 1930 से 1932 के बीच पूरे राज्य... Read more
महात्मा गाँधी का कौसानी प्रवास
भारत की आजादी के आन्दोलन में उत्तराखण्ड के कुमाऊं का स्वर्णिम योगदान रहा है. 1921 के कुली बेगार जैसे आन्दोलनों में बागेश्वर के स्थानीय नागरिकों ने गजब की राष्ट्रीय चेतना का परिचय दिया. जिस स... Read more
नमक सत्याग्रह और नैनीताल
12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने साबरमती से डांडी यात्रा प्रारंभ कर दी. डांडी यात्रा में उत्तराखंड से तीन सत्याग्रही अल्मोड़े के ज्योतिराम काण्डपाल, भैरव दत्त जोशी और देहरादून के खडग बहादुर... Read more
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