क्यों नहीं किसी के साथ भाग जाती वो
मुझे सचमुच इस चीज़ से फ़र्क नहीं पड़ता कि उसे कैसा लगता है मेरे बिना … खा़स तौर पर मैं उन दिनों से सीधे-सीधे आंख बचाकर निकल जाता हूं जिन पर हमने अपने नाम लिखकर उड़ा दिए थे. मैं वाकई नह... Read more
शोला था जल बुझा हूं
मेहदी हसन को हम किस तरह याद करेंगे ये सोचना मुश्किल नहीं है क्योंकि उन्हें सुनते रहिए तो भूलने की हिमाकत हो ही नहीं पाएगी. मुश्किल तो ये सोच पाना है कि उन्हें भुलाया कैसे जाएगा. कोई रंग, कोई... Read more
सपने में भी भेड़ प्यासी है
शायदा चंडीगढ़ में रहने वाली पत्रकार शायदा का गद्य लम्बे समय से इंटरनेट पर हलचल मचाता रहा है. इस दशक की शुरुआत से ही उनका ब्लॉग बहुत लोकप्रिय रहा. वे साहित्य, कला और संगीत के अलावा सामाजिक म... Read more
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