शैलेश मटियानी की कहानी : उसने तो नहीं कहा था
Posted By: Sudhir Kumaron:
राइफल की बुलेट आड़ के लिए रखी हुई शिला पर से फिसलती हुई जसवंतसिंह के बाएँ कंधे में धँसी थी, मगर फिर भी काफी गहरी चोट लग गई थी. उसकी आँखें इस वेदना से पथराकर यों घूम गई थीं, जैसे गोली खेलने म... Read more
शैलेश मटियानी की कहानी : बित्ता भर सुख
Posted By: Sudhir Kumaron:
अपने इस नए कार्यक्षेत्र में आने के बाद उसे यह पहला बच्चा जनवाना है. परसों जब वह यहाँ पहुँची, शाम काफी गहरी हो चुकी थी. जहाँ से वह आई है, शहर नितांत छोटा-सा, मगर शहर की अन्य सुविधाओं के साथ,... Read more
पोस्टमैन : शैलेश मटियानी की कहानी
Posted By: Sudhir Kumaron:
लिफाफे के बाहर पता यों लिखा हुआ था :सोसती सिरी सरबोपमा – सिरीमान ठाकुर जसोतसिंह नेगी, गाँव प्रधान – कमस्यारी गाँव में, बड़े पटबाँगणवाला मकान, खुमानी के बोट के पास पता ऊपर लिखा, प... Read more
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