हे सहकर्मी! हे कुलीग! तुम आखिर ऐसे क्यों हो? किसी रेडियोऐक्टिव पदार्थ से, ऑफिस में विकिरण फैलाते. अपनी चाल, आँखों और बातों से बेधने वाली अल्फा, बीटा, गामा किरणें फेकते. (Satire by Priy Abhis... Read more
बा-बा ब्लैक शीप में बा का मतलब
अपनी देशज भाषा, जिसे आप प्रतिदिन बोलते हैं, उसे जब किसी दूसरे को समझाते हैं तो एक दम भाषाविज्ञानी जैसी अनुभूति होती है. किसी ने हमसे पूछा कि ये ‘बा’ क्या है, जो बृज में बहुत प्रय... Read more
घर में अमनचैन के लिए संस्कारी दंपत्तिओं को शांतिपाठ का यह अनुष्ठान नित्य करना चाहिए
घर की सुख-शांति के लिये दंपत्ति प्रतिदिन विशेष शांतिपाठ करें. यह शांतिपाठ, सामान्य शांतिपाठ से भिन्न है. इस शांतिपाठ के लिये सबसे पहले हेतु (कारण) की खोज करें. यह हेतु कुछ भी हो सकता है. यह... Read more
खाँटी साहित्यकारों की साहित्यिक बातें
उनका फोन कई दिन से आ रहा था. औपचारिकतावश मैंने भी दो-तीन बार फोन कर लिया. हम दोनों ने एक दूसरे से बिल्कुल एक समान बातें कीं. आपका लेखन बहुत अच्छा है, आपसे मिलना चाहिये, आप में बहुत सम्भावनाए... Read more
लेखकों के सपने
मेरे द्वारा लिखे गये एक लेख के लिये सरकार मुझे गिरफ़्तार कर लेती है. मेरी गिरफ़्तारी से पूरे देश में दंगा भड़क जाता है. युवा सड़क पर उतर आते हैं. मुझे जंजीरों से बांध कर पैदल ले जाया जा रहा है.... Read more
व्यंग्य के लिये विषय की खोज
आज सुबह-2 फोन पर जो ख़बर मिली उसे सुन कर हम खुशी से फूले न समाये. फोन एक बहुत बड़े पत्रकार-लेखक-विचारक का था, जिन्हें हम अपना गुरु मानते हैं और प्रेम से ‘दादा’ कहते हैं. यदि किसी व्यक्ति को ना... Read more
तूतू – मैंमैं
‘आखिर हुआ क्या?’ ‘होना क्या था? वो हमें बाज़ार में मिले. हमे बहुत जाने-पहचाने से लगे.’ ‘फिर?’ ‘हम भी उन्हें बहुत जाने पहचाने से लगे. वो हमे पहचानने क... Read more
व्यंग्य का जन्म किस प्रकार होता है?
कल एक मित्र का फोन आया. मित्र मुम्बई में हैं, और अभिनय के क्षेत्र में अपना नाम कमा रहे हैं. वैसे तो मित्रों के फोन आते रहते हैं, परन्तु ये फ़ोनकॉल विशेष थी. ये फोनकॉल, मुझ लेखक के लेखन की प्र... Read more
भाई साहब! मैं बाल कवि नहीं हूँ!
उसका वहां होना, जहां उसे नहीं होना चाहिये था, स्वयं में एक घटना थी. सभागृह- प्रेक्षागृह, वाचनालय- पुस्तकालय, विश्वविद्यालय-मदिरालय, ऐसे न जाने कितने आलयों में वह निरन्तर जाता रहा था. कहते है... Read more
सरकारी विभागों में पावती, सिर्फ पावती नहीं है
उस कक्ष में पांच कर्मचारी उपस्थित थे- तीन पुरुष और दो महिलायें. सभी कुछ देर पहले ही अपने-अपने स्थानों पर आकर बैठे थे. शासकीय भाषा में कहें तो मध्याह्न पूर्व का समय था. कक्ष में -ज़मीन पर, टेब... Read more
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