प्रिय अभिषेक की ‘लग्गू कथा’ का दूसरा भाग
“मे आई कम इन सर?”(Satire by Priy Abhishek September 2021) “कहिये! तुमको बताया था न कि तुम्हारे काम में प्रॉब्लम है. नियमों में कोई ….. ” “नहीं, नहीं सर, काम के लिये नहीं आया हूँ. मैंने आपकी... Read more
प्रिय अभिषेक की ‘लग्गू कथा’
“आप भी लिखते हो?” बाबूजी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए मुझसे कहा, जब मैंने उनको बताया कि मैं लिखता हूँ. मैं उनके सामने टेबिल के उस पार बैठा था. “हमारे साहब को पढ़ा है कभी?” उन्होंने पूछा.(Satir... Read more
सरसराना: प्रिय अभिषेक का चुटीला व्यंग्य
“क्या आप अपनी नौकरी से परेशान हैं? क्या आपको अपनी नौकरी में अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है?(Sarsarana Satire by Priy Abhishek) क्या नौकरी के दौरान आप को यह महसूस होता है कि आप इस नौकरी म... Read more
चटोराबाद में मोहिनी से भेंट
मोहिनी मोहक है. मोहिनी मनभावन है. मोहिनी आज भैया के पास खड़ी है. मोहिनी स्थिर है. मोहिनी स्वाधार है. उसका एक पैर पंक मे उगे छोटे से टापू पर स्थापित है, और दूसरा पैर सुदूर स्थित भैया के ठेले... Read more
बोलने वाला शायर बनने का मंतर
“क्या हुआ चचा जान? बड़े बेउम्मीद-बेसहारा से दिख रहे हो!”(Shayar Satire by Priy Abhishek) “यार, शेर लिख-लिख कर मर गया; कोई रिस्पांस नहीं आता. कुछ मदद करो.” भोगीलाल कंसल्टेंसी के दर पर आज हाजी... Read more
बनारस. कल बनारस के लंका थाना क्षेत्र में पुलिस ने छापा मारकर अवैध कविता बनाने का कारखाना पकड़ा. मौके पर कविता बनाने की मशीन, और अनेक कवियों के फोटो युक्त रैपर भी बरामद किये गए. जिन पर फोटो क... Read more
इंद्रसभा के आमंत्रण षड्यंत्र होते हैं
“अरी ऐरी आली!”(Satire by Priy Abhishek 2021) “हाँ सखी!” “आली, पूछ न क्या गजब हुआ उस दिन!” “क्या हुआ सखी, बता तो ज़रा?” “अरी इंद्रसभा का आमंत्रण था…” “हाय दैया, इंद्रसभा का?” “हाँ आली,... Read more
चुपचाप समय काट लो
“तो हुआ यूँ कि प्रभु दत्तात्रेय के निर्देश पर चित्रगुप्त भगवान् ने श्रीमदभागवत में अमेंडमेंट कर चौबीस गुरुओं में पच्चीसवें गुरु ‘गर्दभ’ को जोड़ेने का प्रस्ताव इंद्र की सभा... Read more
सालों पुराना नुस्खा: छोटा कैनवास
“साहिबान, गाड़ी आपकी चलने वाली है. आपका ध्यान चाहूँगा. बस दो मिनट लूँगा आपका.साहब, कई बार कविता सुनते हैं, उसको पचा नहीं पाते. खुद की कविता लिखने की इच्छा होती है, जिससे अपच बढ़ जाती है. क्र... Read more
प्रिय अभिषेक का चुटीला व्यंग्य ‘माचिस कहां है’
एक कप पानी. एक कप दूध. अरे गैस तो जलाई ही नहीं. माचिस कहाँ है? कहाँ है माचिस? गैस के नीचे गिर गई होगी. यहाँ तो नहीं है. फ्रिज के ऊपर? यहाँ भी नहीं है. हो सकता है फ्रिज के पीछे गिर गई हो, झाँ... Read more
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