एक गुच्छा बयंगकार के साथ ढाई किलो कबि
“कवि हैं, अच्छे वाले?” “बहिनी कौन सा, नया, कि पुराना?” “भैया पिछली बार पुराने कवि ले गई थी, सब मीठे निकल गए. इस बार नया दो.” “कितना तौलूँ?”... Read more
क्या हम इतने बुरे थे
कल कमाल हो गया. हम लिखते और देखते ही रह गए और हमारा मित्र अमर हो गया. कल आलोचक जी ने उसको भर-भर के गालियां दीं. ऐसी गालियां जिनकी साहित्यकार केवल तमन्ना ही कर सकते हैं. न जाने कितने लेखक-कवि... Read more
दस रुपये में भविष्य दर्शन
“आइये, आइये, भविष्य में चलिये, दस रुपये में भविष्य दर्शन, दस रुपये, दस रुपये!” कुछ लोग ज़ोर-ज़ोर से आवाज लगा रहे थे. बस-अड्डे पर तीन-चार गाड़ियां खड़ी थीं. तभी किसी गाँव से एक दल... Read more
चड्डा साहब का लाइव टेलीकास्ट
आख़िर कब तक चड्डा साहब धैर्य रखते? कब तक? पंद्रह दिन बेचैनी में काटने के बाद, उन्होंने भी घोषणा कर दी कि वे भी राष्ट्र के नाम अपना संदेश देंगे. “कल बारह बजे लाइव आऊँगा और करोना से जुड़... Read more
लेखकों को पाठक बनकर समझ आ रहा है कि उन्होंने जनता का कितना उत्पीड़न किया है
कोरोना के इस लॉक-डाउन से एक बात बाखूबी समझ आ रही है कि चुनाव सम्बंधी एक्ज़िट पोल क्यों फ़ेल हो जाते हैं. क्यों बड़े-बड़े विद्वानों के भी अनुमान गलत हो जाते हैं. लॉक-डाउन के सम्बंध में लेखकों... Read more
अभिमन्यु चक्रव्यूह में फंस गया है तू : दंतकथा
जीवन का दर्शन, जीवन का महात्म्य, जीवन के साथ ही समझ आता है. समय सबसे बड़ा शिक्षक है. आयु कहीं-न-कहीं आपको कम आयु वाले से वरिष्ठ बनाती ही है. हम सब उन यात्रियों की तरह हैं जो, किसी स्टेशन से... Read more
दादाजी और लुल्ली संग बारात में सर्कस की मौज
“अरे बेटा बरुन जल्दी करो, लेट है गये हैं.” दादाजी ने स्कूटर से उतर कर तेजी से कदम बढ़ाते हुए कहा.बहोड़ापुर से सागरताल की तरफ़ जाने वाली सड़क पर आज जाम लगा हुआ था. उस सड़क पर कतार... Read more
वह कवि था घटना पर कविता लिख रहा था
इस घटना से सभी चिंतित थे. पुलिस मौके की जाँच कर रही थी. पत्रकार मौके से रिपोर्ट कर रहा था. परिजन और पड़ोसी मौके पर दुखी थे. नेताजी जी मौके पर दुखी तो नहीं थे, पर मौके पर दुख व्यक्त कर रहे थे... Read more
कोरोना वायरस के कारण पूरा देश लॉक डाउन कर दिया गया है. सभी अपने घरों में कैद हैं. लॉक डाउन, कोरोना वायरस को तेजी से फैलने से रोकने में बहुत कारगर है. परन्तु इससे दूसरी बीमारी फैलने का खतरा म... Read more
अरुण यह मधुमय देश हमारा
शाम को टहलते हुए सोच रहा था कवि ने ऐसा क्यों कहा – अरुण यह मधुमय देश हमारा? वह कह सकता था – देखो यह मधुमय देश हमारा, अथवा – अहो यह मधुमय देश हमारा. कविगण भूत, भविष्य,... Read more
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