पीटर बैरन ने बायीं ओर की सलेटी शिला पर कुछ पलों के लिए अपनी पीठ टिकायी और जैकेट की ऊपरी जेब से डायरी निकालकर उसमें आज की तारीख का पन्ना खोला : 27 अप्रेल, 1835. उम्मेद सिंह और दुर्गादत्त पीठ... Read more
आज जब नैनीताल समेत उत्तर भारत के सभी विख्यात हिल स्टेशनों में क्रिसमस-न्यू ईयर पर पर्यटकों की भीड़ उमड़ा करती है, तमाम ट्रेवल एजेंसियां तरह-तरह के ऑफर्स दे रही हैं, छोटे-छोटे कस्बों में क्रिसम... Read more
Popular Posts
- किन हिन्दू ग्रंथों में आता है कैलाश मानसरोवर का जिक्र?
- अधिकांश पहाड़ी जगहों के नाम में वहां का इतिहास और भूगोल छिपा रहता है
- अजपथों से हिमशिखरों तक : हिमालय प्रेमी घुमक्कड़ों के लिए एक जरूरी किताब
- उत्तराखंड विकास नीतियों का असमंजस
- उत्तराखंड में मौजूद अशोक के शिलालेख में क्या लिखा है?
- यारसागुंबा ही नहीं यह हिमालयी जड़ भी बनाती है आपको जवान
- उत्तराखंड में सेवा क्षेत्र का विकास व रणनीतियाँ
- जब रुद्रचंद ने अकेले द्वन्द युद्ध जीतकर मुगलों को तराई से भगाया
- कैसे बसी पाटलिपुत्र नगरी
- पुष्पदंत बने वररुचि और सीखे वेद
- चतुर कमला और उसके आलसी पति की कहानी
- माँ! मैं बस लिख देना चाहती हूं- तुम्हारे नाम
- धर्मेन्द्र, मुमताज और उत्तराखंड की ये झील
- घुटनों का दर्द और हिमालय की पुकार
- लिखो कि हिम्मत सिंह के साथ कदम-कदम पर अन्याय हो रहा है !
- पुष्पदन्त और माल्यवान को मिला श्राप
- डुंगरी गरासिया-कवा और कवी: महाप्रलय की कथा
- नेहरू और पहाड़: ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ में हिमालय का दर्शन
- साधारण जीवन जीने वाले लोग ही असाधारण उदाहरण बनते हैं : झंझावात
- महान सिदुवा-बिदुवा और खैंट पर्वत की परियाँ
- उत्तराखंड में वित्तीय अनुशासन की नई दिशा
- राज्य की संस्कृति के ध्वजवाहक के रूप में महिलाओं का योगदान
- उत्तराखण्ड 25 वर्ष: उपलब्धियाँ और भविष्य की रूपरेखा
- आजादी से पहले ही उठ चुकी थी अलग पर्वतीय राज्य की मांग
- मां, हम हँस क्यों नहीं सकते?
