कुमाऊँ में रुहेला आक्रमणकारियों ने लगभग सभी मन्दिरों को लूटा और उनमें रखी हुई मूर्तियों को तोड़ा. जागेश्वर ही अपनी स्थिति के कारण एक ऐसा प्राचीन स्थल है जहाँ वे नहीं पहुँच पाये. जागेश्वर कुम... Read more
ई. शर्मन ओकले ने अपनी किताब ‘होली हिमालयाज’ में लिखा है कि चंद राजाओं के समय राजा ने आत्मरक्षा के लिये जो नियम बनाये वह रूस के जार के नियमों से भी कठोर थे. दरसल ओकले जिन नियमों क... Read more
अल्मोड़े में अपनी राजगद्दी छिनने के बाद चंद राजा मोहनचंद मदद के लिये जगह-जगह भटक रहा था. उसे गुजर के लिये 10 रुपये रोज के मिल रहे थे जिसमें उसकी गुजर कहां होनी थी. मोहन चंद मदद के लिये रामपुर... Read more
महात्मा गाँधी का कौसानी प्रवास
भारत की आजादी के आन्दोलन में उत्तराखण्ड के कुमाऊं का स्वर्णिम योगदान रहा है. 1921 के कुली बेगार जैसे आन्दोलनों में बागेश्वर के स्थानीय नागरिकों ने गजब की राष्ट्रीय चेतना का परिचय दिया. जिस स... Read more
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