तोर मोनेर कथा एकला बोलो रे
कहो देबी, कथा कहो – 43 पिछली कड़ी – और भी थे इम्तिहां वे निराशा के दिन थे. मन खिन्न रहता था. प्रमोशन के इंटरव्यू में सैलेक्शन क्या नहीं हुआ कि आसपास की फ़िजा ही बदलने लगीं. कल तक के कई स... Read more
और भी थे इम्तिहां
कहो देबी, कथा कहो – 42 पिछली कड़ी- समय के थपेड़े ज़िंदगी जम कर इम्तिहां ले रही थी और हम थे कि दमखम से इम्तिहां देते चले जा रहे थे. शायद सरदार अंजुम के शब्दों में भीतर कहीं मन में हम भी सोचते थे... Read more
समय के थपेड़े
कहो देबी, कथा कहो – 41 पिछली कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 40 कई बार सोचता था कि समय आखिर कितनी परीक्षा लेगा? लखनऊ में ही तनाव से इतना तंग आ चुका था कि इस्तीफा लिख कर सदा जेब में रखता था, यह सोच... Read more
दिल्ली फिर एक बार
कहो देबी, कथा कहो – 39 पिछली कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 38 तो, परिवार को साल भर के लिए लखनऊ में अकेला छोड़ कर मैं दिल्ली आ गया. समय के साथ कितनी बदल गई थी दिल्ली! पहली बार सन् 1958 में उसे तब द... Read more
तो जाना ही पड़ा लखनऊ से
कहो देबी, कथा कहो – 38 पिछली कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 37 शहर लखनऊ में जब हम कायदे से रस-बस गए, शहर ने हमें अपना लिया और हमने लखनऊ से बाहर पूरे अंचल में अपने बैंक के लिए जनसंपर्क और प्रचार की... Read more
कहो देबी, कथा कहो – 37 पिछले कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 36 बैंक की नौकरी के दौरान मैं जिस इलाके में जाता, खाली समय मिलने पर किसी साथी से दिल की बात कहता कि आसपास किसी से मुलाकात करा दें, किसी... Read more
अनजाने संपेरे, नट और जादूगर
कहो देबी, कथा कहो – 36 पिछले कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 35 “कहो देबी, कहां चले गए थे? हम तो कान लगाए हुए थे, कथा सुनने के लिए.” “क्या बताऊं, जाना पड़ा कहीं और कथा सुनाने के लिए. दिल्ली से मुंबई... Read more
साथ चलती हुई चीजें : वे तखत, जड़ें और जैकेट
ललछोंह लकड़ी की इस टीवी ट्रॉली और किताबों की इन दो छुटकी रैकों को जब भी देखता हूं तो राजपुरा, हल्द्वानी में बयालीस वर्ष पहले ठेकेदार राम सिंह मेवाड़ी जी से खरीदा वह पहाड़ी तुन का मोटा, सूखा तना... Read more
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस और प्रोफेसर रामन
आज राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) के अवसर पर, आइए अपने देश के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर चंद्रशेखर वेंकट रामन की स्मृति को नमन करें. उन्होंने जो खोज की... Read more
वह डायरी, ट्राजिस्टर और स्टोव
कतिपय कारणों से हमारे प्रिय लेखक देवेन मेवाड़ी की सीरीज कहो देबी, कथा कहो इस सप्ताह प्रकाशित नहीं की जा सकी है. सीरीज का अगला हिस्सा अगले सप्ताह नियत दिन प्रकाशित किया जायेगा. इस सप्ताह देवेन... Read more
Popular Posts
- उत्तराखण्ड में वन्य-जीवों का आतंक
- उनके बारे में जो सिर्फ नाम नहीं जीवन हैं
- उत्तराखण्ड के आयुष के हाथ में दिल्ली की रणजी टीम की कमान
- उत्तराखण्ड की उन्नति शर्मा ने देश का गौरव बढ़ाया, कॉमनवेल्थ -26 में जीता कांस्य
- बचपन से छीन ली गई बचपन की तस्वीर
- खसों पर हुए वैज्ञानिक अध्ययन
- वह माला के गेट पर सुबह-शाम पहरा देते मिलता
- पहाड़ो में भूस्खलन
- जर्मन की लड़ाई और रुद्रनाथ की चढाई
- हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी
- हैप्पी बर्थडे कॉर्बेट साहब
- 28 साल के युवा से जब टिहरी रियासत डर गई
- दुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास
- गांधीजी ने दुनिया के सबसे बड़े अहिंसक आंदोलन का संचालन कैसे किया?
- भारत में आँसू गैस के गोले सबसे पहले अंग्रेज़ लाए थे
- कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल
- हरेला: प्रकृति, परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- हरेले के रंग में पहाड़ : फोटो निबन्ध
- अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत
- खड़कमाफी के जीवन में एक दशक से विचरते एकदंत गजराज
- क्या उत्तराखंड, पारिस्थितिक वहन क्षमता को लागू कर सकता है?
- रिंगाल आधारित शिल्प : उत्तराखण्ड का एक परम्परागत कुटीर उद्योग
- कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा
- चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार
- मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब
