सोलहवीं सदी में बागेश्वर गए थे गुरु नानकदेव जी
Posted By: Kafal Treeon:
उत्तराखण्ड में सिख सम्प्रदाय का प्रसार -1 सिख मत के साथ उत्तराखंड का संपर्क इसके प्रवर्तक गुरु नानकदेव जी के समय में ही हो चुका था. ज्ञानी ज्ञानसिंह द्वारा लिखे गए ग्रन्थ ‘गुरु खालसा’ में वर... Read more
212 की छात्रसंख्या वाले जीआईसी बघर में महज 5 एलटी के अध्यापक कार्यरत हैं। स्कूल का नाम ‘इंटरमीडिएट कॉलेज’ है और इंटरमीडिएट में विज्ञान वर्ग के विषयों के साथ ही कला वर्ग के भी विष... Read more
Popular Posts
- कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा
- चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार
- मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब
- पहाड़ की पुकार जो खींच ले गई मुझे
- ‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है
- सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन
- मानव और प्रकृति का संबंध प्राचीन, गहरा और अविभाज्य है
- न रुकदि छै, न थकदि छै, नयार जन बगदि छै : संकट में है नयार
- कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा
- दिव्य आम का स्वाद जीभ पर नहीं पेट के सबसे चोर हिस्से पर कब्ज़ा जमाता है
- उत्तराखंड राज्य की अवधारणा किसी एक नेता या आंदोलन से नहीं बनी
- एक ‘युवा’ एथलीट जिनकी उम्र 92 वर्ष है!
- रिंगाल: पहाड़ की बुनावट में छिपा रोजगार और जीवन
- हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी
- भारतीय परम्परा और धरती मां
- शकटाल का प्रतिशोध
- एटकिंसन : पहाड़ आधारित प्रशासन का निर्माता
- बीमारी का बहम और इकदँडेश्वर महाराज का ज्ञान
- बजट में युवाओं के लिए योजना का ढोल है पर उसकी गमक गुम है
- जापान में आज भी इस्तेमाल होती है यह प्राचीन भारतीय लिपि
- आज है उत्तराखंड का लोकपर्व ‘फूलदेई’
- द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनीं में : अलविदा, दीवान दा
- हिमालय को समझे बिना उसे शासित नहीं किया जा सकता
- पहाड़ों का एक सच्चा मित्र चला गया
- कुमाऊँ की खड़ी होली
