गांव सिरसोली की पार्वती देवी से लेकर शिकागो यूनिवर्सिटी तक एकमत हैं मेहमाननवाजी को लेकर
वह भी क्या दौर था, जब मेहमानों के आते ही खुशी छा जाती थी. अतिथि देवो भव की सनातन परंपरा का बखूबी निर्वहन हुआ करता था. परिवार का हर सदस्य अतिथि के स्वागत-सत्कार के लिए आतुर हो उठता था. मेहमान... Read more
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 33 पिछली क़िस्त का लिंक: कई-कई बच्चे पैदा कर चुकी असंख्य महिलाएं भी सेक्स के सुख से अंजान हैं यदि डॉक्टर की मानूं तो आज से ठीक 20 दिन बाद तुम मेरे पेट से नि... Read more
तुम से माफी माँगता हूं सतपुली की विजेश्वरी!
नदी की तरफ उतरते समय वह किनारे पर कपड़े धोती नजर आती है. हम नदी के तट पर दो-एक घंटे घूमते रहते हैं. वापस आते हैं तो वह काम से फारिग हो पुल की बगल में फुरसत में बैठी घाम तापती दिखती है. (Stor... Read more
एक अल्मोड़िया शगल ऐसा भी
अमूमन हर आदमी को कोई न कोई शौक-शगल-खब्त-आदत-लत होती है. फेहरिश्त काफी लंबी हो सकती है. इसमें कचहरी जाना भी शामिल है. बड़ी ही जानदार लत है. तंबाकू जैसी असरदार. कब गिरफ्त में ले लेती है, पता न... Read more
ख़ाकी मर्ज, फ़र्ज़ और कर्ज़ की खिचड़ी है
युधिष्ठिर सरोवर में लोटा डुबाने ही वाले थे कि बगुला रूपी यक्ष प्रकट हुए और अपनी चिर-परिचित प्रश्नोत्तरी प्रस्तुत की. यक्ष- हे युधिष्ठिर ख़ाकी वर्दी क्या है? युधिष्ठिर- कुत्ता भगा... Read more
ऐसा भी कहीं होता है?
पिछली पोस्ट में मैंने भारत के कालजयी लेखक प्रेमचंद के परिवार के साथ रहने के कारण खुद को सौभाग्यशाली व्यक्तियों में माना था. शायद यह मेरा सौभाग्य ही रहा होगा, हालाँकि मुझे नहीं मालूम कि सौभाग... Read more
नाम में क्या रखा है
नाना के पास कहानियां थीं. नानी तो हमारे कहानी सुनने की उम्र से पहले ही खुद कहानी हो गईं थीं इसलिए हमने जब कहानी को कहानी की तरह पाया तो सामने नाना थे. शायद यही वजह रही हो कि हमें नानी और कहा... Read more
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