बाबू का घर छोड़ना और अकेले बालक का संघर्ष – त्रिलोक सिंह कुंवर की आत्मकथा का दूसरा हिस्सा
Posted By: Kafal Treeon:
(पिछली कड़ी – पिछली सदी के पहाड़ का दर्द जी उठता है त्रिलोक सिंह कुंवर की आत्मकथा में) जब मैं छात्रावास में ही था, अगस्त 1938 के पहले हफ़्ते में मुझे एक हरकारे द्वारा छः पन्ने का पत्र प्... Read more
कुमाऊं के पहले क्रांतिकारी जिनके सर पर हज़ार रुपये का इनाम रखा था अंग्रेजों ने
Posted By: Girish Lohanion:
भारत छोड़ो आंदोलन की पहली तारीख को ही कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया. जिसके कारण आंदोलन के नेतृत्वहीन हो चुका था. इसके बाद आंदोलन एक स्वतः-स्फूर्त आंदोलन था जिसमें प्रत्ये... Read more
Popular Posts
- उत्तराखंड बजट : स्वयं स्फूर्ति से परिपक्वता की ओर
- बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’
- कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
- कैसे अस्तित्व में आया नारायण आश्रम और कौन थे नारायण स्वामी?
- घमंडी पिता और उसकी सीख
- उत्तराखंड के पेड़-पौधे: लोकज्ञान और औषधीय सत्य
- सामाजिक उत्पीड़न को सम्पूर्णता में व्यक्त करते हैं ‘जागर गीत’
- क्या चंद शासकों से पहले अल्मोड़ा में नंदादेवी का कोई मंदिर था?
- ‘काल्द’ यानी भैरव पहली बार कैसे प्रकट हुए?
- कैसा था नंदा देवी में गायब हुआ परमाणु डिवाइस?
- उपकोशा और उसके वर
- मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा
- बाल, माल व पटालों का शहर : अल्मोड़ा
- आज ‘नशा नहीं-रोजगार दो आन्दोलन’ की 42वीं वर्षगांठ है
- 200 साल पुराने यात्रा-वृतांत में कुमाऊँ के ‘खस’
- तिवारी मॉडल में पहाड़ की उद्योग नीति और पलायन
- बंदर बहादुर के चोर तेंदुए को जंगल से भगाने वाली लोककथा
- 200 साल पहले कैसा था उत्तराखंड
- जब तक सरकार मानती रहेगी कि ‘पलायन’ विकास की कीमत है, पहाड़ खाली ही होते रहेंगे
- एक रोटी, तीन मुसाफ़िर : लोभ से सीख तक की लोक कथा
- तिब्बती समाज की बहुपतित्व परंपरा: एक ऐतिहासिक और सामाजिक विवेचन
- इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक स्मृति के मौन संरक्षक
- नाम ही नहीं ‘मिडिल नेम’ में भी बहुत कुछ रखा है !
- खेती की जमीन पर निर्माण की अनुमति : क्या होंगे परिणाम?
- नेपाल के रहस्यमयी झांकरी : योगी, वैद्य, तांत्रिक या ओझा?
