कुमाऊं की रामलीला पर ‘गिर्दा’ का एक महत्वपूर्ण लेख
कुमाऊॅं (उत्तराखण्ड) में प्रचलित रामलीला सम्भवतः संसार का एक मात्र ऐसा गीत नाट्य है जो ग्यारह दिनों तक लगातार क्रमशः चलता है और जिसमें कई-कई बार बाजार का पूरा एक हिस्सा-पूरा इलाका ही मंच बन... Read more
जनकवि गिर्दा को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया
गीत और झोडे़ गाकर दी श्रद्धांजलि अल्मोड़ा. रिमझिम बारिश की फुहारों के साथ जब स्वागत की छत माल रोड-अल्मोड़ा में गिर्दा के गीत गाए तो सड़क पर छाते लिए लोग रुक कर वीडियो बनाने लगे. कामगार अपनी... Read more
पारंपरिक लोक-संगीत की धरोहर ‘हरदा सूरदास’
बात कुछ साल पुरानी होगी. संभवतः 1980-81 की. मई-जून का महीना. नैनीताल टूरिस्टों से खचा-खच भरा हुआ. शहर की माल रोड मोटर-कारों से त्रस्त. ऐसे वातावरण में स्टेट बैंक मल्लीताल के पास मेरे कान में... Read more
रामलीला के बहाने नये – नये प्रयोग भाग : 2
पिछली कड़ी तो एक बार भवाली की टीम को ‘राम वनवास’ वाला प्रसंग मिला प्रस्तुति के लिये. राम-लक्ष्मण का वनवासी वेष धारण करने का दृश्य जिस प्रभावकारी और सादगी के साथ उन्होंने मंच पर प्रस्तुत किया... Read more
रामलीला के बहाने नये – नये प्रयोग भाग : 1
कुमाऊॅं (उत्तराखण्ड) में प्रचलित रामलीला सम्भवतः संसार का एक मात्र ऐसा गीत नाट्य है जो ग्यारह दिनों तक लगातार क्रमशः चलता है और जिसमें कई-कई बार बाजार का पूरा एक हिस्सा-पूरा इलाका ही मंच बन... Read more
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