भीमा-कोरेगांव हिंसा प्रकरण के सिलसिले में हाल में गिरफ्तार किये गए कवि-राजनैतिक कार्यकर्ता वरवर राव की पुत्री से महाराष्ट्र पुलिस द्वारा पूछे गए सवालों की बानगी देखिये –
“आपके दलित पति किसी परंपरा का पालन नहीं करते हैं. आप तो ब्राह्मण हैं आपने सिंदूर क्यों नहीं लगाया है?”
“आपके कपड़े किसी दूसरी गृहिणी के जैसे क्यों नहीं हैं?”
“क्या जरूरी है कि बेटी को अपन पिता जैसी हो?”
ध्यान रहे कि महाराष्ट्र पुलिस टीम ने ने वरवर राव की बेटी और दामाद के घर पर भी छापे मारे थे. कवि वरवर राव के दामाद के. सत्यनारायण से पूछे गए कुछ सवाल ये थे –
“आपके घर में इतनी किताबें क्यों है?”
“क्या ये आप सारी किताबें पढ़ते हैं?”
“आप इतनी किताबें क्यों पढ़ते हैं?”
(बीबीसी हिन्दी की एक पोस्ट के आधार पर)
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गिरीश कर्नाड लिखित *तुगलक* कल ही खत्म किया ।पता नही क्यो?वो प्ले आज कल जीवंत हो उठा है.
इमाम और मौलवियों को जो भी एवं के हक की बात करता था उसे बेरहमी से क़त्ल करवा दिया गया जो तुगलक के*मन की बात करता* वो सूबेदार बन जाता या अहम पदों पर आशिन हो जाता।चांदी के सिक्के बन्द कर ताँबे के करवाये गए ,पूरी अर्थव्यवस्था चौपट कर दी ।
इत्तफाक ही होगा ये वरना गिरीश कर्नाड को क्या पता ऐसा भी होगा?
थाने उठाकर ले जाना चाहिये था सारी किताबों को। खाली समय में सारे पुलिसवाले पढ़ डालते।