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थल में नदी किनारे छक्के लगाने वाली श्वेता वर्मा का बल्ला अब भारत के लिये बोलेगा

रामगंगा नदी के किनारे सदियों पुरानी बसासत है थल. सदियों से थल आस-पास के लोगों की जरूरत पूरा करने वाला एक अहम बाज़ार रहा है. इसी छोटे से कस्बे की रहने वाली एक बेटी पिछले कई सालों से भारत के लिये खेलने का सपना लिये मेहनत कर रही थी. थल इंटर कालेज से बारहवीं करने के बाद क्रिकेट को लेकर उसका जूनून उसे अल्मोड़ा ले आया. आज इस जूनून के चलते भारत की महिला क्रिकेट में श्वेता वर्मा का नाम शामिल है.
(Shweta Verma Cricketer)

एकता बिष्ट और मानसी जोशी के बाद श्वेता वर्मा उत्तराखंड से तीसरी महिला खिलाड़ी हैं जिनका भारतीय महिला टीम के लिये सलेक्शन हुआ है. श्वेता के पिता मोहन लाल वर्मा का निधन काफ़ी पहले हो चुका था. उनकी माता कमला वर्मा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं. श्वेता के बड़े भाई की थल में ही दुकान है.

एकता बिष्ट और श्वेता वर्मा

श्वेता के कोच लियाकत अली बताते हैं कि करीब सात साल पहले मैंने थल में एक लड़की के खेल की तारीफ़ सुनी थी. दायें हाथ की इस बल्लेबाज को देखकर मैं भी चकित रह गया था. इसे बाद उसे अल्मोड़ा बुलाया और प्रशिक्षण देना शुरु किया. श्वेता की पेशेवर क्रिकेट की ट्रेनिग यहीं से शुरु हुई. बीते शनिवार को जब भारत और साउथ अफ्रीका के बीच होने वाले पांच टेस्ट मैचों के लिये खिलाड़ियों की सूची जारी की गयी उसमें श्वेता वर्मा बतौर विकेटकीपर बल्लेबाज शामिल हुई हैं.
(Shweta Verma Cricketer)

श्वेता ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई थल से ही की. थल के इंटर कालेज से बारहवी करने के बाद श्वेता ने अल्मोड़ा से बी.ए. और एम.ए. किया. 2016 से श्वेता उत्तर प्रदेश की टीम से खेल रही हैं. पिछले वर्ष उनका चयन इण्डिया ‘ए’ टीम में हुआ.   

श्वेता वर्मा पहाड़ की उन सभी लड़कियों के लिये प्रेरणा हैं जो हर पल अपने सपनों के लिये संघर्ष करती हैं. अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और कोच लियाकत अली को देने वाली श्वेता हर उस शख्स के लिये प्रेरणा स्त्रोत हैं जो मुश्किलों के बावजूद अपने सपनों के लिये हमेशा मेहनत करता है.
(Shweta Verma Cricketer)

काफल ट्री डेस्क

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