कला साहित्य

कहानी : शिकार की जुगत

गांव में लगातार तीन दिन बारिश होने के बाद आज शिकार की जुगत कार्यक्रम का आयोजन गोकुल के घर पर किया जाना है. अतः पनी राम, नैनू, हीरा सिंह तीनों बहुत उत्साहित है. तीनों कहानी के मुख्य पात्र हैं. पनी राम इन तीनों में सबसे ज्यादा उम्रदराज है लेकिन इन तीनों की मित्रता उम्र आड़े नहीं आती. तीनों का एक दूसरे से व्यवहार हम उम्र जैसा और कुछ हद तक यारों दोस्तों जैसा है. पनी राम, जो सत्तर बसंत देख चुके हैं, को अभी भी नैनू और हीरा सिंह जैसे युवा मित्रों से हंसी ठिठोली करने में असीम आनंद प्राप्त होता है. (Story Shikar ki Jugat)

पनी राम के दो पुत्र सरकारी सेवा में कार्यरत है और दोनों ही हल्द्वानी में दांपत्य जीवन में व्यस्त हैं. दो बेटियों की गृहस्थी कहीं बस चुकी है. भरा-पूरा परिवार होने के बावजूद भी पनी राम आज अकेला ही अपनी पत्नी के साथ गांव में जीवन बिता रहा है. कभी-कभी उसके बेटे बेमन से उसे शहर ले जाने की जिद करते हैं लेकिन पनी राम को शहर में घुटन सी होती है. उसे तो अपना अभावों से भरा हुआ पहाड़ ही प्यारा है. यहां की हर चीज से उसे प्यार है.

नैनू इक्कीस वर्ष का नवयुवक है. उसका दांपत्य जीवन अभी प्रारंभ नहीं हुआ है इस वजह से वह बेफिक्र नवयुवक है. वह दो बार पुलिस में भर्ती हेतु फिजिकल परीक्षा दे चुका है लेकिन बेचारा लिखित में औंधे मुंह गिर जाता है. इन बातों को वह ज्यादा गंभीरता से नहीं लेता है. उसका बड़ा भाई फौज में है जो उसे हर महीने जेब खर्च हेतु मनी ऑर्डर भेज देता है. 

हीरा सिंह पैंतीस वर्ष का है वह सिंचाई विभाग में क्लर्क के पद पर अन्यत्र कार्यरत है आजकल वह अपने बच्चों के स्कूल में छुट्टियों की वजह से गांव आया है. संभवतः यह समय ही उसका सबसे सुखप्रद समय है .

आज पूरे गांव में बड़ा ही उल्लास उमड़ रहा है. गांव के छोटे-छोटे बच्चे सुबह उठकर ही तिमुल की पत्तियों को बटोरने में लगे हैं. गांव की सारी औरतें आज रोज की तरह लकड़ी बटोरने और घास काटने नहीं जाएंगी क्योंकि वह सभी आज घर पर रहकर ही किसी विशेष उत्सव में शामिल होने की तैयारी कर रही हैं. यह विशेष उत्सव है शिकार की जुगत का.

गोकुल के घर पर ही शिकार की जुगत के इस उत्सव का महाआयोजन होना है. उत्सव के प्रारंभ होने से पूर्व ही गांव के सभी संभ्रांत माने-जाने लोगों की एक विशेष बैठक होती है. बैठक में आकर्षण के प्रमुख बिंदु ये तीनों नायक — पनी राम नैनू और हीरा सिंह है. आज इन तीनों का प्रभुत्व हिंदी सिनेमा के नायकों से कम नहीं है. इन तीनों से आज गांव का हर व्यक्ति शिकार के बंटवारे के बारे में बात करना चाहता है. सभा का वरिष्ठतम व्यक्ति होने के कारण पनी राम शिकार के संबंध में एक विस्तृत कार्य योजना सभी के सामने रखता है. ऐसा करते हुए वह अपनी असीम वाकपटुता का भी परिचय देता है. नैनू शिकार में प्रयुक्त होने वाले सभी अस्त्र शस्त्रों का भली-भांति निरीक्षण करता है और जिनकी धार कम हो चुकी है उनको चिकने पत्थर में रगड़ कर पैना करता है. धार तेज करते हुए वहां अपने बालों को भी लहराता है और बार-बार हाथ से अपने बालों को संजोता है. जितने बार वह अपने बालों पर हाथ फेरता है उतनी बार वह उत्सव में आई युवतियों को भी देख लेता है.

 हीरा सिंह पूरे मनोयोग से सभी आंकड़ों का अध्ययन कर एक कुशल अर्थशास्त्री की भांति शिकार के मूल्य का निर्धारण करने में व्यस्त है. मूल्य के बारे में अभी तक एकमतता नहीं है. अंत में चिंतन मनन करने के बाद, जिस प्रकार से हमारे देश के वित्त मंत्री संसद में बजट प्रस्तुत करते हैं उतने ही गंभीरता पूर्वक व सतर्कता से हीरा सिंह भी शिकार के मूल्य का गुणवत्ता के आधार पर निर्धारण करने का निर्णय लेते हैं. वहां उपस्थित सभी लोग हीरा सिंह की इस कुशाग्रता की तारीफ कर रहे हैं. इस प्रशंसा को सुनकर हीरा सिंह फूला ना समा रहा है. हीरा सिंह को आज उस आनंद की अनुभूति हो रही है जो उसे सरकारी कार्यालय में कार्य करते हुए कभी भी अनुभव नहीं हुई थी.

इसी बीच में वहां पर राजनीति पर भी चर्चा परिचर्चा होने लगी. आज सभी वयोवृद्ध लोगों ने लगभग सभी राजनीतिक दलों और उनके सम्मानित नेताओं को निशाने में लिया है. उनकी इस वाद विवाद के सामने न्यूज़ चैनल की डिबेट भी फीकी प्रतीत होती है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कार्यों के बारे में भी वहां पर चर्चा होती है. कुछ लोग अपने अपने सुझाव जनहित के कार्य हेतु दे रहे हैं. चाय की चुस्की लेते हुए हीरा सिंह, नैनू और पनी राम राजनीति का अपडेट ले रहे हैं.

 शिकार का बंटवारा करते समय नैनू हीरा सिंह और पनी राम एक अलग ही व्यक्तित्व का परिचय दे रहे हैं क्योंकि अभी तक उनको देखकर यह लग रहा था कि निसंदेह है यह तीनों, शिकार का बंटवारा करते समय तटस्थ नहीं रहेंगे लेकिन जैसे ही कार्यक्रम प्रारंभ हुआ तीनों ने अपना काम द्रुत गति से करना शुरू कर दिया. शिकार के प्रत्येक टुकड़े को देखने से यह प्रतीत होता है कि इसकी निश्चित नाप के अनुसार ही काट-छांट की गई है. हीरा सिंह नैनू और पनी राम तीनों अपने सामने बिछी हुई तिमिल की पत्तियों पर गांव के सभी घरों के लिए उनका बांट अर्थात हिस्सा तैयार कर रहे हैं. तीनों के हाथ अभी एक मशीन की तरह है काम कर रहे हैं. उनसे ना कोई गलती होती है, ना ही उनके काम में कोई धीमापन आता है. नैनू अपने मनोविनोदी स्वभाव से सभी को गुदगुदाने का काम भी कर रहा है. पनी राम असंतुष्ट ग्राहकों को आश्वस्त करने में व्यस्त हैं. हीरा सिंह ग्राहकों से पैसे का लेन देन कर रहा है . इस कार्यक्रम के समाप्त होने तक तीनों अपना सर नहीं उठाते. तीनों के चेहरे में  ना तो इस काम को करने की कोई थकान दिखाई देती है. हर ग्राहक तीनों को उनके कार्य के लिए धन्यवाद करता है. तीनों आज इतना अधिक काम करने के बाद भी थके नहीं हैं तीनों अपने कार्य से संतुष्ट हैं. तीनों इसी संतुष्टि के भाव के साथ ही अपना-अपना बांट लेकर अपने घर की ओर चल देते हैं.

आशा टम्टा राजकीय कन्या इंटर कॉलेज मालधन चौड़, रामनगर, नैनीताल में अंग्रेजी की प्रवक्ता हैं .

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