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यह कैसा सम्मान है उत्तराखंड के चैम्पियन मुक्केबाज का

यह तस्वीर दिल्ली के खेल गांव की है. खेल गांव में एक ब्लॉक का नाम उत्तराखंड के मुक्केबाज पदम बहादुर मल्ल के नाम पर है. भारत के सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों में गिने जाने वाले पदम बहादुर मल्ल को सम्मान देने के लिये इस ब्लॉक का नाम रखा गया है पदम बहादुर मल्ल ब्लॉक पर यह कैसा सम्मान है जिसमें नाम ही गलत लिखा गया है.
(Padam Bahadur Mall Block)

मोटे अक्षरों में लिखा गया पदम बहादुर मॉल ब्लॉक सरकारों की लापरवाही नहीं बल्कि उनका अपने खिलाड़ियों प्रति गंभीरता दिखाता है. यह बोर्ड दिखाता है सरकारें सम्मान के लिये नहीं बल्कि महज खानापूर्ति के लिये बोर्ड बनावाती है.       

भारतीय मुक्केबाजी के इतिहास में पदम बहादुर मल्ल का नाम सबसे सम्मानित नामों में है. एशियन गेम्स में बेस्ट बाक्सर का खिताब जीतने वाले आज तक वह एकमात्र भारतीय हैं. साइंटिफिक बाक्सिंग का जनक पदम बहादुर मल्ल को ही माना जाता है.

1953 में 1/8 गोरखा रायफल में भर्ती हुये पदम बहादुर मल्ल आज भी राज्य में बाक्सिंग की संभावनाएं तलाशते नज़र आ जायेंगे. 1962 में एशियन गेम्स जकार्ता में हुए. भारत के मुक्केबाजों से किसी को कोई ख़ास उम्मीद थी नहीं. जब जकार्ता में एशियन गेम्स खत्म हुए तो बेस्ट बाक्सिंग प्लेयर का खिताब एक भारतीय को मिला. 60 किग्रा भार वर्ग से खेले पदम बहादुर मल्ल. भारत के लिये बाक्सिंग में पहला गोल्ड मेडल जितने वाले पदम बहादुर मल्ल. पदम बहादुर मल्ल सन 1959 से 1963 तक लगातार चार साल राष्ट्रीय चैम्पियन रहे.
(Padam Bahadur Mall Block)

पदम बहादुर मल्ल सन 1984 में आर्मी से बतौर ऑनरी कैप्टन रिटायर हुए थे उसके बाद वह कई वर्षों तक बाक्सिंग के प्रशिक्षक भी रहे. 74 वर्ष की उम्र तक पदम बहादुर मल्ल बाक्सिंग की राष्ट्रीय चयन समिति के सदस्य भी रहे. पदम बहादुर मल्ल को अर्जुन अवार्ड भी मिला है. साल 2013 में उत्तराखंड सरकार ने पदम बहादुर मल्ल को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड के लिये चुना.

उम्मीद है इस छोटे से राज्य से ताल्लुक रखने वाले इस खिलाड़ी का नाम सही करने की संबंधित विभाग एक दिन जरुर करेगा.
(Padam Bahadur Mall Block)

-काफल ट्री डेस्क

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