फोटो: अखिलेश बोहरा
पिथौरागढ झूलाघाट रोड पर स्थित कासनी गांव के पास ही एक देवलसमेत बाबा का सेरादेवल मंदिर स्थित है. देवलसमेत बाबा सोरघाटी के लोकदेवता हैं. देवभागा और चन्द्रभागा नदियों के संगम पर बसे सेरादेवल को देवलसमेत बाबा का मूल स्थान माना जाता है.
(Seradeval Temple Pithoragarh Chaitol Festival)
चैतोल के दिन सेरादेवल में भव्य धार्मिक आयोजन होता है. सोरघाटी के 22 गावों में घुमने वाली छात सेरादेवल रिखांई (आठगांव शिलिंग) से आती है. सेरादेवल में देवडांगरों के बोलवचन होते हैं. सेरादेवल से छात जामड़ और कोस्टाका नामक मंदिरों में होकर छात बिंण गांव के नायकूड़ा की ओखलसारी में स्थापित होती है.
चैतोल लोकपर्व की विस्तृत जानकारी यहां पढ़िये: चैतोल पर्व : लोकदेवता देवलसमेत द्वारा सोरघाटी के बाईस गांवों की यात्रा का वर्णन
सेरादेवल मंदिर में चैतोल की तस्वीरें देखिये, सभी तस्वीर अखिलेश बोहरा ने भेजी हैं:
Support Kafal Tree
.
काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें
सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई…
जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी से कल शाम मुलाकात हुई. दरअसल,उनके निर्देशन में…
उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा के मुख्य आकर्षण में से एक रामलीला का मंचन इन…
लोग इसे पहाड़ और पलायन की कहानी की तरह देखेंगे. लोग इसे खंडहर होते जा…
पिछली कड़ी : सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन संघर्षनामा का ये किस्सा आजादी…
गाँव में सब उसे जानते थे. कोई उस के पास सब्जी लेने आता तो वह…