उत्तराखंड के हरसिल में 60 के दशक में खुला गया था आखिरी छोर का डाकखाना. यह सीमान्त डाकखाना भारत तिब्बत सीमा पर तैनात सेना और दुर्गम गावों की संचार जरूरतें पूरा करने के लिए खोला गया था.
जीर्णोद्धार कि बाट जोह रहे इस डाकखाने को आखिरकार प्रदेश सरकार द्वारा धरोहर के रूप में विकसित करने का फैसला किया गया है.
जिला प्रशासन के माध्यम से किये जाने वाले इस विकास के लिए प्रथम चरण में 5 लाख रुपया स्वीकृत किया गया है. बर्फीले हिमालय, झरनों और हरी-भरी वादियों के बीच बना यह मनमोहक डाकखाना 80 के दशक में राजकपूर की निगाहों में आया और चर्चित फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ का खासा हिस्सा यहाँ फिल्माया गया. तभी से यह देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गया.
फिल्म के खासे हिस्से और कथानक के केंद्र में यही डाकखाना रहा.
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