Featured

तुम होगे साधारण ये तो पैदाइशी प्रधान हैं

इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं
दंत-कथाओं के उद्गम का पानी रखते हैं
पूंजीवादी तन में मन भूदानी रखते हैं
इनके जितने भी घर थे सभी आज दुकान हैं
इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं

उद्घाटन में दिन काटें रातें अख़बारों में
ये शुमार होकर मानेंगे अवतारों में
कोई क्या सीमा-रेखा नापे इनके अधिकारों की
ये स्वयं जन्म-पत्रियाँ लिखते हैं सरकारों की
ये तो बड़ी कृपा है जो ये दिखते भर इंसान हैं
इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं

उत्सव के घर जन्मे समारोह ने पाले हैं
इनके ग्रह मुँह में चाँदी की चम्मच वाले हैं
तुम होगे साधारण ये तो पैदाइशी प्रधान हैं
इन्हें प्रणाम करो ये बड़े महान हैं

मुकुट बिहारी सरोज

मुकुट बिहारी सरोज

26 जुलाई 1926 को जन्मे मुकुट बिहारी सरोज आधुनिक हिन्दी कविता में कम जाना हुआ लेकिन महत्वपूर्ण नाम हैं. उनकी कविता की किताबे किनारे के पेड़ और पानी के बीज प्रकाशित हुईं. अपनी कविता में उन्होंने भारतीय समाज और उसकी राजनैतिक-सामाजिक व्यवस्था पर गहरे तंज किये. 18 सितम्बर 2002 को उनकी मृत्यु हुई.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

हो हो होलक प्रिय की ढोलक : पावती कौन देगा

दिन गुजरा रातें बीतीं और दीर्घ समय अंतराल के बाद कागज काला कर मन को…

3 weeks ago

हिमालयन बॉक्सवुड: हिमालय का गुमनाम पेड़

हरे-घने हिमालयी जंगलों में, कई लोगों की नजरों से दूर, एक छोटी लेकिन वृक्ष  की…

3 weeks ago

भू कानून : उत्तराखण्ड की अस्मिता से खिलवाड़

उत्तराखण्ड में जमीनों के अंधाधुंध खरीद फरोख्त पर लगाम लगाने और यहॉ के मूल निवासियों…

4 weeks ago

यायावर की यादें : लेखक की अपनी यादों के भावनापूर्ण सिलसिले

देवेन्द्र मेवाड़ी साहित्य की दुनिया में मेरा पहला प्यार था. दुर्भाग्य से हममें से कोई…

4 weeks ago

कलबिष्ट : खसिया कुलदेवता

किताब की पैकिंग खुली तो आकर्षक सा मुखपन्ना था, नीले से पहाड़ पर सफेदी के…

1 month ago

खाम स्टेट और ब्रिटिश काल का कोटद्वार

गढ़वाल का प्रवेश द्वार और वर्तमान कोटद्वार-भाबर क्षेत्र 1900 के आसपास खाम स्टेट में आता…

1 month ago