Featured

पिघलता हिमालय की संपादक कमला देवी का निधन

पिघलता हिमालय समाचार पत्र की संपादक श्रीमती कमला देवी का आज प्रातः आकस्मिक निधन हो गया.

कमला देवी का जन्म 16 नवम्बर 1951 को इन्द्रा देवी व ज्वालाप्रसाद पाण्डे के घर रानीखेत में हुआ. आपने इण्टर तक की शिक्षा रानीखेत से प्राप्त करने के बाद एमबी कालेज, हल्द्वानी से हिन्दी में स्नातकोत्तर किया. 1971 में इनका विवाह आनन्द बल्लभ उप्रेती के साथ हुआ. सरकारी नौकरी करने के बजाय इन्होंने पति के छापाखाने ‘शक्ति प्रेस’ में सहयोग देना शुरू किया. वह दौर जब अखबार ट्रेडिल प्रेस में छपा करते थे. उसके फर्मों में अक्षर पिरोकर पाठ्य बनाने, प्रूफ रीडिंग से लेकर मशीन में कागज उठाने, अखबार मोड़ने तक का कार्य हाथों से ही किया जाता था. उन्होंने इस तरह के सभी कार्य सहज ही किये.

उन्होंने संघर्षशील परिवार की कठिन जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए हुए लेखन-पत्रकारिता के दायित्व को भी बखूबी निभाया. इसके अलावा आप सामाजिक, राजनीतिक रूप से भी सक्रिय रहीं. उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन में आन्दोलनकारी रहीं. राजनीतिक तौर पर सक्रिय रहने के बावजूद मुख्यधारा की राजनीति आपको कभी रास नहीं आयी.

2013 को अचानक पति आनन्द बल्लभ उप्रेती के निधन के बाद भी आपने पत्रकारिता के उनके मिशन को जारी रखा. पिघलता हिमालय के सम्पादक के रूप में वह अब तक सक्रिय पत्रकारिता कर रही थीं. कमला देवी हल्द्वानी की पत्रकारिता में एक युग की प्रतिनिधि थीं. उनका जाना पत्रकारिता जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

1 week ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

2 weeks ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

2 weeks ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

2 weeks ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

2 weeks ago