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ध्यानपुर का प्राचीन नंदीश्वर महाराज मंदिर

ऊधम सिंह नगर ज़िले के नानकमत्ता क़स्बे से मात्र 6-7 किलोमीटर दूर ध्यानपुर गाँव में स्थित है श्री नंदीश्वर दरबार मंदिर जो कि भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज को समर्पित है. इस मंदिर को क्षेत्र के प्राचीनतम मंदिरों में से एक माना जाता है. मंदिर में उकेरी गई लिखावट से पता चलता है कि मंदिर का जीर्णोद्धार विक्रम संवत 2063 में श्री पंच आह्वान अखाड़ा द्वारा किया गया था.
(Nandishvar Maharaj Mandir Dhyaanpur)

स्थानीय लोगों की इस मंदिर में गहरी आस्था है. उनकी मान्यता है कि नई गाय के ब्याने के बाद उसका पहले कुछ दिनों का दूध नन्दीश्वर मंदिर में चढ़ाना चाहिये. इसी मान्यता को ध्यान में रखते हुए स्थानीय लोग अपनी गायों की कुशलता की कामना लेकर मंदिर में दूध चढ़ाने अक्सर आते हैं.

सिर्फ़ स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि दीवाली के त्यौहार के दिनों में उत्तराखंड के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी हज़ारों लोग इस मंदिर में दर्शन करने व नंदी महाराज को दूध व घी चढ़ाने के लिए आते हैं. कुछ दशक पहले तक एक छोटा सा नंदी महाराज को समर्पित मंदिर ही लोगों की आस्था का केंद्र था लेकिन कालांतर में मंदिर प्रांगण में भगवान शिव, शनि महाराज व महंत कमलगिरी (मंदिर के संस्थापक महंत) की समाधि भी मंदिर प्रांगण में स्थापित कर दिये गए हैं.
(Nandishvar Maharaj Mandir Dhyaanpur)

मंदिर का अहाता एक बड़े हिस्से में फैला हुआ है जिसके बीचोंबीच दशकों पुराना पीपल का विशालकाय पेड़ है. इसी पीपल के पेड़ के नीचे महंत कमलगिरी की समाधि है. मंदिर के आसपास नीम, बेल, आम, अशोक आदि के पेड़ मंदिर प्रांगण को छाँव व हरियाली से भर देते हैं. खासकर मई जून की गर्मी में मंदिर के प्रांगण में बैठना सुकून देता है. मंदिर की कुछ तस्वीरें आपके लिएः

कमलेश जोशी

नानकमत्ता (ऊधम सिंह नगर) के रहने वाले कमलेश जोशी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक व भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबन्ध संस्थान (IITTM), ग्वालियर से MBA किया है. वर्तमान में हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग में शोध छात्र हैं.

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