Featured

जौलजीबी मेला 2018 – फोटो निबन्ध

जौलजीबी का मेला एक ऐतिहासिक ही नहीं सांस्कृतिक मेला भी है. नेपाल और पिथौरागढ़ सीमांत के इस क्षेत्र के लोगों के बीच एक लम्बे समय से रोटी बेटी का रिश्ता रहा है. जौलजीबी के मेले में व्यापार के साथ दोनों देशों के लोग अपने रिश्ते नातेदारों के लिये खाने का, पहनने का सामान भी लेकर आते थे. आज जौलजीबी के मेले का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है. पारम्परिक भोजन की जगह मो-मो, चाऊमीन और मुरादाबाद की बिरयानी ने ले ली है. काली पर प्रस्तावित पंचेश्वर बाँध अगर बना तो जौलजीबी के मेले का यह बदला स्वरूप भी नहीं बचेगा.

जौलजीबी मेले 2018 के पहले दिन की कुछ तस्वीरें. सभी फोटो नरेंद्र सिंह परिहार ने ली हैं.

 

मूलरूप से पिथौरागढ़ के रहने वाले नरेन्द्र सिंह परिहार वर्तमान में जी. बी. पन्त नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ हिमालयन एनवायरमेंट एंड सस्टेनबल डेवलपमेंट में रिसर्चर हैं.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

उत्तराखंड के पहाड़ों का कटु सत्य है पायर “चिता”

विनोद कापड़ी द्वारा निर्मित चर्चित फ़िल्म पायर "चिता" पूरे देश में रिलीज गई है. 26…

2 days ago

डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया: उत्तराखंड के इतिहास, समाज और अर्थव्यवस्था को समझने की एक दृष्टि

पिछली कड़ी : धन सिंह राणा ‘संघर्षनामा’ डॉ. रघुनन्दन सिंह टोलिया की पुस्तक, "द कुमाऊं…

2 days ago

पहाड़ का वह बूढ़ा पिता

पहाड़ के एक छोटे-से गाँव में एक पिता रहता था. उम्र अब ढलने लगी थी,…

2 weeks ago

कुमाऊं में रामलीला की परम्परा

सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई…

3 weeks ago

‘पायर’ फिल्म के सुलगते सवाल…

जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी से कल शाम मुलाकात हुई. दरअसल,उनके निर्देशन में…

3 weeks ago

हुक्का क्लब अल्मोड़ा की रामलीला से एक्सक्लूसिव तस्वीरें

उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा के मुख्य आकर्षण में से एक रामलीला का मंचन इन…

3 weeks ago