इतिहास

जवाहर लाल नेहरू अल्मोड़ा जेल में

जवाहरलाल नेहरू (नवंबर 14, 1889 – मई 27, 1964)

भारत की आजादी के शिल्पियों में से एक रहे नेहरू के बारे में आजकल एक धारणा फैलाई जा रही है कि ‘नेहरू ने भारत की आजादी के लिए किया ही क्या?.’ इस धारणा के जड़ पकड़ते जाने में भारतीयों का इतिहास का कम ज्ञान और नेहरू के खिलाफ जमकर किया गया झूठा प्रचार दोनों जिम्मेदार रहे हैं. (Jawahar Lal Nehru Almora Jail)

जवाहर लाल नेहरू ने अपने जीवन के 3259 महत्वपूर्ण दिन अंग्रेजों की हिरासत में भारतीय जेलों में गुजारे. वे कुल मिलाकर लगभग 9 साल विभिन्न जेलों में रहे.

नेहरू को 2 बार अल्मोड़ा की जेल में लाया गया था. पहली दफा उन्हें बरेली जेल से अल्मोड़ा जेल में शिफ्ट किया गया, वहां उनकी तबियत ख़राब हो रही थी. 28 अक्टूबर 1934 को नेहरू अल्मोड़ा जेल पहुंचे और 3 सितम्बर 1935 तक यहां क़ैद रहे. 10 जून 1945 से 15 जनवरी 1946 को वे दूसरा दफा अल्मोड़ा जेल में कैद किये गए. अपनी चर्चित पुस्तक ‘भारत एक खोज’ के महत्वपूर्ण अंश भी जवाहर लाल नेहरू ने यहीं पर लिखे थे.  

इस जेल में नेहरू द्वारा इस्तेमाल की गयी वस्तुएं — बिस्तर, फर्नीचर, थाली, लोटा, गिलास, दीपदान आदि आज भी सुरक्षित रखे हुए हैं. जिस बैरक में नेहरू को कैद करके रखा जाता था उसे आज नेहरू वार्ड कहा जाता है.

अल्मोड़ा जेल में नेहरू वार्ड. इसी बिस्तर, मेज और कुर्सी का इस्तेमाल नेहरू ने किया था

जवाहर लाल नेहरू के अलावा इस जेल में भारत के दिग्गज स्वतंत्रता सेनानी भी कैदी रहे हैं. खान अब्दुल गफ्फार खान, सय्यद अली जौहर, आचार्य नरेन्द्र देव के अलावा उत्तराखण्ड के अन्य कई स्वतंत्रता सेनानी, गोविन्द बल्लभ पंत, बद्री दत्त पांडे, विक्टर मोहन जोशी, देवी दत्त पंत भी इस जेल के कैदी रहे हैं.

पाब्लो नेरुदा ने क्या लिखा था गांधी, नेहरू और भारत के बारे में

इस ऐतिहासिक जेल को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में स्मारक बनाने की सरकारी घोषणा की जा चुकी है.   (Jawahar Lal Nehru Almora Jail)

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Sudhir Kumar

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