महाभारत के अनुसार अज्ञातवास के समय जब पांडवों का विवाह द्रौपदी से हुआ तब पहली बार उसके द्वारा गोल-गप्पे (पानी-पूरी) बनाये गये. द्रौपदी द्वारा पांडवों को कराया गया पहला भोजन गोल-गप्पा है. हुआ कुछ यूं कि द्रौपदी को पांडवों के साथ घर आने के बाद परम्परा अनुसार कुछ न कुछ बनाना था. पांडवों की माता कुंती जानती थी कि उन्होंने अभी अज्ञातवास में लम्बा रहना है सो अनाज को हिसाब से खर्चा जाना है.
(Golgappa Mahabharat Draupdi History)
इस परम्परा को निभाने के साथ कुंती ने द्रौपदी की बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेनी चाही और उसे थोड़ा गुथा हुआ आटा पकड़ाकर पांडवों के लिये भोज तैयार करने को कहा. द्रौपदी ने अपनी बुद्धिमत्ता दिखाते हुये रसोई में पड़े पिछले दिन के मसाला आलू और आटे का इस्तेमाल कर गोल-गप्पे इजात किये.
पांडव और माता कुंती, द्रौपदी के गोल-गप्पे खाकर इतने तृप्त हुये कि उन्होंने गोल-गप्पे को अमर होने का आशीर्वचन दिया. तभी देश के हर कोने में आज गोल-गप्पों का अलग-अलग नामों से प्रताप है. गोल गप्पे की एक स्टैंडर्ड प्लेट में पांच गोल-गप्पे होने का मुख्य कारण भी यही बताया जाता है.
(Golgappa Mahabharat Draupdi History)
साल 2013 में कोरा में यह बात मजाक के तौर पर जगन्नाथ अभिनव द्वारा लिखी गयी थी. टीवी चैनल से लेकर अपने ब्लॉग ने महाभारत और गोल-गप्पे के रिश्ते को पौराणिक मुहर दे दी है. मतलब आदमी ने इससे आगे पढ़ा भी नहीं क्योंकि जगन्नाथ अभिनव ने इसी पोस्ट में आगे लिखा है :
इसी कारण से पानी पूरी खाती हर भारतीय लड़की गुप्त रूप से मन में अच्छे पति की कामना रखती है और वह पानी पूरी वाले के पास उसे घूरने वाले पाँचों आदमियों को दिखाना चाहती है कि वह एक अच्छी पत्नी बनने से कई अधिक सक्षम है.
वैसे मजे की बात यह है कि इस देश में आलू पुर्तगाली अपने साथ 17वीं सदी के शुरुआत में लेकर आये थे. इस बात से यह सीधा समझा जा सकता है कि द्रौपदी और गोल-गप्पे का कोई संबंध नहीं है.
(Golgappa Mahabharat Draupdi History)
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