Featured

रामगंगा और सरयू के बीच बसा गंगोलीहाट

समुद्रतल से लगभग 1,760 किमी की ऊंचाई पर स्थित गंगोलीहाट का नाम तो सभी ने सुना होगा. रामगंगा और सरयू के बीच में बसे गंगोलीहाट का नाम ही इन दो नदियों के कारण गंगोलीहाट है.

सरयू और रामगंगा के बीच में स्थित होने के कारण इस क्षेत्र का पुराना नाम गंगावली है. उत्तराखंड में पवित्र नदियों के लिए स्थानीय रुप से गंग शब्द का प्रयोग किया जाता है आवली का अर्थ एक माला से है. इन दोनों को मिलाकर ही गंगावली शब्द बना है. गंगावली का अपभ्रंश ही गंगोली है. हाट का अर्थ बाजार से है. इस तरह गंगोलीहाट शब्द बना हुआ है.

योगेश सरकार द्वारा द हिमालयन फेसबुक पेज पर साझा तस्वीर.

तेरहवीं सदी से पहले यहां कत्युरों का शासन था बाद में मनकोटी राजाओं का शासन हुआ. कुमाऊं के चंद राजा बालो कल्याण चंद ने सोलहवीं शताब्दी में मनकोटी राजाओं की राजधानी मनकोट पर हमला किया और गंगोली को अपने राज्य का हिस्सा बना दिया.

अंग्रेजों के कार्यकाल में यह अल्मोड़ा जिले का एक परगना बना. पिथौरागढ़ जिला बनने के बाद यह एक तहसीन बना. वर्तमान में इसे एक जिला बनाने की मांग पिछले कई वर्षों से चल रही है.

गंगोलीहाट उत्तराखंड के उन चंद हिस्सों में से है जहां कृषि संबंधी अपार संभावनाएं हैं. यहां के कई स्थानीय ग्रामीण फल,सब्जी इत्यादि के उत्पादन से अपनी आजीविका भी चलाते हैं.

कुमाऊं हिमालया फेसबुक पेज से साभार

इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र में अनेक गुफा मंदिर जैसे पाताल भुवनेश्वर, मुक्तेश्वर, शैलेश्वर भी हैं. यहां काली प्रसिद्ध शक्तिपीठ भी है. तेरहवीं शताब्दी में कत्यूरी शासक रामचंद्र देव द्वारा अपनी मां की याद में बनाया गया जाह्नवी का नौला, एक अन्य आकर्षण का केंद्र है.

हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने गंगोलीहाट स्थित विष्णु मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया. यह विष्णु मंदिर दक्षिण भारतीय शैली में बना है. विष्णु के गर्भगृह में कृष्ण व बलराम की प्रतिमाएं हैं. यह उत्तराखंड का एक मात्र मंदिर है जहां कृष्ण व बलराम की स्वतंत्र प्रतिमाएं हैं.

गंगोलीहाट की पिथौरागढ़ मुख्यालय से दूरी लगभग 78 किमी है. काठगोदाम रेलवे स्टेशन से यह लगभग दो सौ किमी की दूरी पर है.

– काफल ट्री डेस्क

वाट्सएप में पोस्ट पाने के लिये यहाँ क्लिक करें. वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री के फेसबुक पेज को लाइक करें : Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

गलगोटिया वाला कॉपी नहीं, असली नवाचार है अल्मोड़ा के रवि टम्टा का ड्रोन

अल्मोड़ा के काफलीखान गांव के रवि टम्टा ने जब अपने बनाए फ्लाइंग व्हीकल "हापिडा स्काईनेक्स"…

21 hours ago

लोक गायिकाओं का समृद्ध इतिहास रहा है पहाड़ो में

उत्तराखंड के पहाड़ों में लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि यहां की सामाजिक-सांस्कृतिक…

2 days ago

कुमाऊं केसरी बद्रीदत्त पांडे का बहुआयामी व्यक्तित्व व कृतित्व : इतिहास से जनआंदोलन तक

पिछली कड़ी : हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी कुमाऊं को विशिष्ट…

5 days ago

उत्तराखण्ड में वन्य-जीवों का आतंक

10 मार्च 2026 को ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखण्ड के वन मंत्री ने विधानसभा…

1 week ago

उनके बारे में जो सिर्फ नाम नहीं जीवन हैं

गोविंदा, रघु, रामकली, चंदा, कृष्णा दा, सूर्या... नाम नहीं जीवन हैं कई दिनों से राजधानी…

1 week ago

उत्तराखण्ड के आयुष के हाथ में दिल्ली की रणजी टीम की कमान

विश्व क्रिकेट के दिग्गज विराट कोहली भी अब टिहरी गढ़वाल के देवप्रयाग निवासी आयुष बड़ौनी…

1 week ago