मेहनती भालू और चालाक सियार की लोककथा

हिमालय की घनी घाटियों और देवदार के जंगलों के बीच एक शांत इलाका था. वहाँ एक ताक़तवर भालू रहता था. उसका शरीर भारी था, आवाज़ गहरी और दिल सीधा-सादा. उसे जंगल के नियमों पर भरोसा था—जो मेहनत करे, वही खाए.

उसी जंगल में एक सियार भी रहता था. दिमाग़ तेज़ था, ज़ुबान मीठी और नज़र हमेशा दूसरे की थाली पर रहती थी. मेहनत से उसे चिढ़ थी, लेकिन चालाकी से उसे बड़ा प्यार था. एक दिन सियार ने देखा कि भालू नदी के किनारे मछलियाँ पकड़ रहा है. ठंडे पानी में घंटों खड़े रहने के बाद भालू ने अच्छी-खासी मछलियाँ जमा कर लीं.

सियार पास आया और बोला, “भाई भालू, तुम तो बड़े बलवान हो. इतना काम अकेले क्यों करते हो? अगर मैं साथ रहूँ, तो काम भी हल्का लगे और मज़ा भी आए.”

भालू ने सोचा, “साथी रहेगा तो अच्छा ही है.” उसने हामी भर दी. अगले दिन दोनों साथ निकले. भालू मेहनत करता, नदी में उतरता, पत्थर हटाता और मछलियाँ पकड़ता. सियार किनारे बैठा रहता, कभी सलाह देता, कभी हौसला बढ़ाता.

शाम को जब खाने का समय आया, सियार बोला, “मैंने तुम्हें सही जगह बताई, इसलिए मुझे बड़ी मछली मिलनी चाहिए.”

भालू ने बिना बहस किए दे दी. कुछ दिनों तक यही चलता रहा. धीरे-धीरे सियार खाने में आगे रहने लगा और भालू मेहनत में.

एक दिन भालू को समझ आ गया. उसने कुछ नहीं कहा, लेकिन मन में योजना बना ली. अगली सुबह भालू बोला, “आज पहाड़ी छत्ते से शहद लाएँगे. ऊपर चढ़ना मुश्किल है, लेकिन शहद मीठा होता है.” सियार की आँखें चमक उठीं.

भालू पेड़ पर चढ़ गया और छत्ता नीचे फेंक दिया. जैसे ही सियार ने मुँह डाला, मधुमक्खियाँ टूट पड़ीं. सियार चीखता हुआ इधर-उधर भागने लगा.

भालू शांति से नीचे उतरा और बोला, “मैंने तो मेहनत की थी. तुमने बस जल्दी दिखाई थी.”

सियार गुस्से में बोला, “तुमने धोखा दिया!”

भालू ने भारी आवाज़ में कहा, “धोखा तब होता है, जब कोई बिना मेहनत के बराबरी माँगे.”

उस दिन के बाद सियार ने भालू का साथ छोड़ दिया. जंगल में उसकी चालाकी की चर्चा तो रही, लेकिन कोई उस पर भरोसा नहीं करता था. भालू आज भी उसी नदी किनारे रहता है — मेहनत करता है और जितना कमाता है, उतने में संतुष्ट रहता है.

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Kafal Tree

Recent Posts

सांस्कृतिक परम्परा की दृष्टि से उत्तराखण्ड एक समृद्ध राज्य है. समय-समय पर यहां के कई…

13 hours ago

‘पायर’ फिल्म के सुलगते सवाल…

जाने-माने पत्रकार, साहित्यकार और फिल्म निर्देशक विनोद कापड़ी से कल शाम मुलाकात हुई. दरअसल,उनके निर्देशन में…

14 hours ago

हुक्का क्लब अल्मोड़ा की रामलीला से एक्सक्लूसिव तस्वीरें

उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा के मुख्य आकर्षण में से एक रामलीला का मंचन इन…

16 hours ago

‘पायर’ पहाड़ की ठोस पीठ है

लोग इसे पहाड़ और पलायन की कहानी की तरह देखेंगे. लोग इसे खंडहर होते जा…

2 days ago

धन सिंह राणा ‘संघर्षनामा’

पिछली कड़ी : सागर से शिखर तक : स्वामी मन्मथन संघर्षनामा का ये किस्सा आजादी…

3 days ago

गौरा को किसी से शिकायत नहीं थी

गाँव में सब उसे जानते थे. कोई उस के पास सब्जी लेने आता तो वह…

5 days ago